अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 427, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ें२ व्यासस्मृति ॥
वेदमन्त्रस्वधास्वाहा वषट्कारादिभिर्विना ॥ ६ ॥
विप्रवद्विप्रविन्नासु क्षत्रविन्नासुक्षत्रवत् ।
जातकमीदिकुर्वीत ततःशूद्रासुशूद्रवत् ॥ ७ ॥
वैश्यासुविप्रक्षत्राभ्यां ततःशूद्रासुशूद्रवत् ।
अधमादुत्तमायां तु जातःशूद्राधमःस्मृतः ॥ ८ ॥
ब्राह्मण्यांशूद्रजनितश्चण्डालोधर्मवर्जितः ।
कुमारीसम्भवस्त्वेकः सगगोत्रायांद्वितीयकः ॥ ६ ॥
ब्राह्मण्यांशूद्रजनितश्चण्डालस्त्रिविधःस्मृतः ।
वर्द्धकीनापितोगोप आज्ञापःकुम्भकारकः ॥ १० ॥
वणिक्किरातकायस्थ मालाकारकुटुम्बिनः ।
वरटोमेदचाण्डाल दासश्वपचकोलकाः ॥ ११ ॥
एतेऽन्त्यजाःसमाख्याता येचान्येचगवाशनाः ।
पुराणोक्त प्रतिज्ञा पूजनादि धर्म का आचरणही है ॥ ६ ॥ ब्राह्मण के साथ विवाही क्षत्रिय कन्या के पुत्रों के जातकर्मादि संस्कार ब्राह्मण के तुल्य, क्षत्रिय से विवाही वैश्यकन्या के पुत्रों के वैश्य के तुल्य और ब्राह्मण क्षत्रिय से विवाही शूद्रकन्या के जातकर्मादि संस्कार शूद्र के तुल्य करे ॥ ७ ॥ अथवा ब्राह्मण क्षत्रिय से विवाही वैश्यकन्या के बालकों के संस्कार वैश्य के तुल्य करे और वैश्य से विवाही शूद्रकन्या से उत्पन्न पुत्रों के जातकर्मादि संस्कार भी शूद्र के ही तुल्य करे। निर्वल अर्थात् उत्तम वर्ण की कन्या में जो पैदा हो वह शूद्र से भी नीच कहा है ॥ ८ ॥ ब्राह्मणी में जो शूद्र से पैदा हो वह सब धर्मों से वर्जित चाण्डाल कहाता है और वह दो प्रकार का है, एक वह जो कुमारी कन्या से पैदा हो, दूसरा वह जो सगगोत्रा (विवाही) से पैदा हो ॥ ९ ॥ ब्राह्मणी में शूद्र से पैदा हुआ चाण्डाल तीन प्रकार का होता है। बढ़ई, नाई, गोप, आज्ञा से जो घड़े बनावे वह (कुम्हार) ॥ १० ॥ वणिक् (जो लेनदेन करे और निषिद्ध जाति हो) किरात, कायस्थ, माली, कुटुम्बी, बरट, मेद चण्डाल, दास, श्वपच, कोलक, ॥ ११ ॥ ये सब और जो गोमांस खावें वे अन्त्यज कहाते हैं इन के संग बोलने से स्नान करे और इन के देखने से सूर्य