अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 433, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ें८ व्यासस्मृति ॥
अरोगदुष्टवंशोत्था मशूल्कदानदूषिताम् ।
सवर्णामसमानार्षाममातृपितृगोत्रजाम् ॥ २ ॥
अनन्यपूर्विकांलघ्वीं शुभलक्षणसंयुताम् ।
धृताधोवसनांगौरीं विख्यातदशपूरुषाम् ॥ ३ ॥
ख्यातनाम्नःपुत्रवतः सदाचारवतः सतः
दातुमिच्छोर्दुहितरं प्राप्यधर्मेणचोद्वहेत् ॥ ४ ॥
ब्राह्मोद्वाहविधानेन तदभावेपरोविधिः ।
दातव्यैपासदृक्षाय वयोविद्वान्वयादिभिः ॥ ५ ॥
पितृतत्पितृभ्रातृषु पितृव्यज्ञातिमातृषु ।
पूर्वाभावेपरोदद्यात्सर्वाभावेस्वयंव्रजेत् ॥ ६ ॥
यदिसादातृवैकल्याद्रजः पश्येत्कुमारिका ।
और जिस स्त्री के कुष्ठादि कोई बड़ा असाध्य वा कष्ट साध्य रोग न हो-दुष्ट वंश की न हो, जिस का बाप धन लेकर विवाह करना न चाहता हो, अपने वर्ण की हो-अपने प्रवर की न हो-तथा जो माता वा पिता के गोत्र की न हो ॥ २ ॥ जिस का अन्य के साथ पहिले विवाह न हुआ हो, जो विशेष मोटी न हो, शुभलक्षणों वाली हो, अधोवस्त्र ( लहंगा ) पहनती हो, गौरी ( ८ वर्ष की ) हो और जिस के कुल में पूर्वज दश पुरुष तक विख्यात कुलीन हों ॥३॥ जिस का नाम विख्यात हो ऐसे पुत्रवाले और अच्छे आचरण वाले की पुत्री हो जो अपनी कन्या का विवाह कर देना चाहता हो, ऐसे की कन्या मिलती हो तो धर्मानुसार शास्त्रोक्त विधि से विवाह कर लेवे ॥४॥ ब्राह्मविवाह की विधि से विवाहे और ब्राह्मविवाह के न हो सकने पर दूसरी ( दैव आदि विवाहों की ) विधि करे और यह पुरुष अवस्था विद्या, और कुलीनता में समान वा कुछ बड़ा हो उस वर के साथ कन्या का विवाह करे ॥ ५ ॥ पिता, पितामह, भाई, चाचा, कुटुम्ब के मनुष्य, माता, इन में पहिले २ के अभाव में अगला २ कन्या का विवाह करे। यदि इन में से कोई भी न हो तो कन्या आप ही योग्य पति के साथ विवाह कर लेवे ॥ ६ ॥ यदि यह कन्या देने वालों की असावधानी वा ढील ढाल से विवाह से पहिले ही रजस्वला होने लगे तो जितने वर्षों तक रजस्वला होती रहे उतनी ही