अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 443, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ें१८ व्यासस्मृतिः ॥
समर्थोऽहिसमर्थेन नाविज्ञातःक्वचिद्वसेत् ॥ ५ ॥ सरित्सरःसुवापीषु गर्तप्रस्रवणादिषु । स्नायीतयावदुद्धृत्य पञ्चपिण्डानिवारिणा ॥ ६ ॥ तीर्थाभावेप्यशक्तोवा स्नायात्तोयैःसमाहृतैः । गृहाङ्गनगतस्तत्र यावदम्बरपीडनम् ॥ ७ ॥ स्नानमब्दैवतैःकुर्यात् पावनैश्चापि मार्जनम् । मन्त्रैःप्राणांस्त्रिरायम्य सौरैश्चार्कंविलोकयेत् ॥ ८ ॥ तिष्ठन्स्थित्वातुगायत्रीं ततःस्वाध्यायमारभेत् । ऋचांचयजुषांसाम्नामथर्वाङ्गिरसामपि ॥ ६ ॥ इतिहासपुराणानां वेदोपनिषदांद्विजः । शक्त्यासम्यक्पठेन्नित्यमल्पमप्यासमापनात् ॥ १० ॥ सयज्ञदानतपसामखिलंफलमाप्नुयात् ।
अपने गुण को जता कर वहां से आदर प्राप्त करे ॥ ५ ॥ नदी, छोटा तालाब, बावड़ी, कुण्ड, झरने इन में से किसी में तब स्नान करे जब पहिले पांच पिण्ड मिट्टी को बाहर निकाल देवे॥६॥ कोई घाट नदी आदि में नहीं वा घाट तक जाने का सामर्थ्य न हो तो नदी आदि से जल मंगाकर वा कुए से जल को भर कर घर के आंगन में जितने जल से पहिना वस्त्र (धोती) भींग जाय उतने जल से स्नान करे ॥७॥ जल है देवता जिनका ऐसे वेद मन्त्रों से स्नान करे और (चित्पतिर्मापुनातु?) इत्यादि पावन मन्त्रों से मार्जन करे और व्याहृत्यादि मन्त्रों से तीन प्राणायाम करके सूर्य देवता वाले मन्त्रों से खड़ा हुआ सूर्य को देखे अर्थात् सूर्य नारायण को देखता हुआ उपस्थान करे॥८॥ फिर खड़ा होकर गायत्री का जप करके ब्रह्मयज्ञ की विधि से वेद का अभ्यास करे ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद ॥९॥ इतिहास, पुराण, वेदों के उपनिषद् इनका थोड़ा भी भाग उन २ की समाप्ति होने तक अपनी शक्ति के अनुसार जो द्विज भली प्रकार पढ़े ( यही स्वाध्याय नामक ब्रह्मयज्ञ कहाता है ) ॥ १० ॥ वह यज्ञ, दान, और तप के सम्पूर्ण फल को प्राप्त होता है तिस से ब्राह्मणादि द्विज पुरुष प्रतिदिन वाणी को वश में रख कर अर्थात् बीच में अन्य कुछ भी