अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 446, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ेंभाषार्थसहिता ॥ २९
पूजयेल्लक्षितैर्मन्त्रैर्जलैर्मन्त्रोक्तदेवताः ॥ २४ ॥ उपस्थायरविंकाष्ठां पूजयित्वाचदेवताः । ब्रह्माग्नीन्द्रौषधीजीवविष्णुवाङ् महतांतथा ॥ २५ ॥ अपांपतेतिसत्कारं नमस्कारैःस्वनामभिः । कृत्वामुखंसमालभ्य स्नानमेवंसमाचरेत् ॥ २६ ॥ ततःप्रविश्य भवनमावसथ्येहुताशने । पाकयज्ञांश्चतुरो विदध्याद्विधिवद्द्विजः ॥ २७ ॥ अनाहितावसथ्याग्निरादायान्नंघृतप्लुतम् । शाकलेनविधानेन जुहुयाल्लौकिकेऽनले ॥ २८ ॥ व्यस्ताभिर्व्याहृतीभिश्च समस्ताभिस्ततःपरम् । षड्भिर्देवकृतस्येति मन्त्रवद्भिर्यथाक्रमम् ॥ २९ ॥ प्राजापत्यंस्विष्टकृतं हुत्वैवं द्वादशाहुतीः । ओंकारपूर्वःस्वाहान्तस्त्यागःस्विष्टविधानतः ॥ ३० ॥
को उन २ के मन्त्रों द्वारा जल से अर्घ देवे ॥२४॥ सूर्य नारायण का उपस्थान करके और पूर्व दिशाओं को उन २ के इन्द्रादि देवताओं सहित नमस्कार करके ब्रह्मा, अग्नि, इन्द्र, ओषधी, जीव, विष्णु, वाक्, महत्, ॥२५॥ अपांपति इन सब का ( अग्नयेनमः ) इत्यादि नाम मन्त्रों से पूजन करके (संवर्चसा०) मन्त्र से मुख का प्रक्षालन करके फिर मध्याह्न का स्नान करे ॥ २६ ॥ फिर घर में जाकर गृह्य अग्नि में ब्राह्मणादि द्विज विधिपूर्वक देव यज्ञादि चारो पाक यज्ञों को करें ॥ २७ ॥ विधिपूर्वक गृह्याग्नि का स्थापन जिस ने न किया हो वह पुरुष घी से सम्यक् प्लावित अन्न को लेकर शाकल्य संहिता में कहे विधान से लौकिक अग्नि में होम करे ॥ २८ ॥ १- ओं भूः स्वाहा । २- ओंभुवः स्वाहा । ३- ओंस्वः स्वाहा । इस प्रकार व्यस्त नाम पृथक् २ तीन व्याहृतियों से तथा- ओंभूर्भुवःस्वः स्वाहा । और ( देवकृतस्यैन० ) इत्यादि शाकल होम के छः मन्त्रों से छः आहुति करके ॥ २९ ॥ इसी प्रकार प्राजापत्य तथा एक स्विष्टकृत् ये सब बारह आहुति करे उक्त सब मन्त्रों के पूर्व ओंकार और अन्त में स्वाहा पद लगावे । त्याग वाक्य गृह्यसूत्रानुसार जानो ॥ ३० ॥