भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

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भाषार्थसहिता ॥ ३९

वेदेषुदृष्टंऋषिभिश्चगीतं तद्ब्रह्महत्यांमुनयोवदन्ति ॥६३॥
ऊषरेवापितंवीजं भिन्नभाण्डेषुगोदुहम् ।
हुतंभस्मनिहव्यंच मूर्खेदानमशाश्वतम् ॥ ६४ ॥
मृतसूतकपुष्टाङ्गो द्विजःशूद्रान्नभोजने ।
अहमेवंनजानामि कांयोनिंसगमिष्यति ॥ ६५ ॥
शूद्रान्नेनोदरस्थेन यदि कश्चिन्म्रियेतयः ।
सभवेत्सूकरोनूनं तस्यवाजायतेकुले ॥ ६६ ॥
गृध्रोद्वादशजन्मानि सप्तजन्मानिसूकरः ।
श्वाचैवसप्तजन्मानि इत्येवंमनुरब्रवीत् ॥ ६७ ॥
अमृतंब्राह्मणान्नेन दारिद्र्यंक्षत्रियस्यच ।
वैश्यान्नं नतुशूद्रत्वं शूद्रान्नान्नरकंव्रजेत् ॥ ६८ ॥
यश्चभुङ्क्तेऽथशूद्रान्नं मासमेकंनिरन्तरम् ।
इहजन्मनि शूद्रत्वं मृतःश्वाचैवजायते ॥ ६९ ॥
यस्यशूद्रापचेन्नित्यं शूद्रावागृहमेधिनी ।


वेदों में भी देखी और ऋषियों ने भी कही है ॥ ६३ ॥ ऊषर में बोया बीज, फूटे पात्र में दुहा दूध, भस्म में किया होम, और मूर्ख को दिया दान ये सब अशाश्वत नाम शीघ्र नष्ट होते हैं अर्थात् निष्फल हैं ॥६४॥ मरेके सूतक में खानेसे पुष्ट हुआ है शरीर जिस का ऐसा शूद्र का भोजन करने वाला ब्राह्मण किस नीच योनि में जायगा यह हम नहीं जानते ॥ ६५ ॥ शूद्र का अन्न पेट में रहते जो ब्राह्मण मरता है वह निश्चय से या तो शूकर योनि में जन्म लेता है अथवा जिसका अन्न खाया है उस शूद्र के ही कुल में जन्म लेता है ॥६६॥ बारह जन्म तक गीध पक्षी, सात जन्म तक शूअर और सात जन्म तक कुत्ता वह शूद्रान्न भोजी ब्राह्मण होता है ऐसा मनु जी ने कहा है ॥ ६७ ॥ ब्राह्मण के अन्न से अमृत देव योनि, क्षत्रिय के अन्न से दरिद्रता, वैश्य के अन्न से शूद्र होना और शूद्र के अन्न से नरक होता है ॥ ६८ ॥ जो ब्राह्मण मनुष्य एक महीने तक निरंतर शूद्र के अन्न को खाता है वह इसी जन्म में शूद्र हो जाता है और मर कर कुत्ता की योनि में हो जाता है ॥६९॥ जिस के यहां शूद्रा स्त्री अन्न