भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

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पृष्ठ 473

८ शंखस्मृतिः ॥

राक्षसोयुद्धहरणात्पैशाचःकन्यकाछलात् ।
तिस्रस्तुभार्याविप्रस्य द्वेभार्येक्षत्रियस्यतु ॥ ६ ॥
एकैवभार्यावैश्यस्य तथाशूद्रस्यकीर्त्तिता ।
ब्राह्मणीक्षत्रियावैश्या विप्रभार्याःप्रकीर्त्तिताः॥ ७ ॥
क्षत्रियाचैववैश्याच क्षत्रियस्यविधीयते ।
वैश्याचभार्यावैश्यस्य शूद्राशूद्रस्यकीर्त्तिता ॥ ८ ॥
आपद्यपिनकर्त्तव्या शूद्राभार्याद्विजन्मना ।
तस्यांतस्यप्रसूतस्य निष्कृतिर्नविधीयते ॥ ९ ॥
तपस्वीयज्ञशीलस्तु सर्वधर्मभृतांवरः ।
ध्रुवंशूद्रत्वमायाति शूद्रान्नाद्येत्रयोदशे ॥ १० ॥
नीयतेतुसपिण्डत्वं येषांशूद्रःकुलोद्भवः ।
सर्वेशूद्रत्वमायान्ति यदिस्वर्गजितश्चते ॥ ११ ॥
सपिण्डीकरणंकार्यं कुलजस्यतथाध्रुवम् ।


युद्ध करके जो कन्या हरी जाय उसे राक्षस और छल से चुराकर कन्या लेली जाय उसे पैशाच विवाह कहते हैं। ब्राह्मण के तीन स्त्री और क्षत्रिय के दो स्त्री हो सकती हैं ॥ ६ ॥ वैश्य और शूद्र के एक २ ही स्त्री हो सकती है, ब्राह्मणी, क्षत्रिया, और वैश्या ये तीन ब्राह्मण की भार्या कही हैं ॥ ७ ॥ क्षत्रिया और वैश्या क्षत्रिय की भार्या * और वैश्य की वैश्या और शूद्र की शूद्रा ही भार्या होती हैं ॥ ८ ॥ आपत्काल में भी ब्राह्मणादि तीनों द्विज शूद्रा के साथ विवाह न करें क्योंकि शूद्रा में पैदा हुए द्विजाति का कोई प्रायश्चित्त नहीं है किन्तु वह पतित ही हो जाता है ॥ ९ ॥ चाहे कैसा ही तपस्वी, यज्ञशील, और सब धर्मात्माओं में श्रेष्ठ भी ब्राह्मण शूद्र के त्रयोदशाह (तेरहवीं) श्राद्ध में जीमने से निश्चय कर शूद्रत्व को प्राप्त हो जाता है ॥ १० ॥ द्विजों के कुल में पैदा हुआ शूद्र जिन द्विजों की सपिण्डी श्राद्ध करे चाहे वे स्वर्ग के भी जीतने वाले हों तो भी वे सब शूद्र हो जाते हैं॥११॥ तिस से कुल में उत्पन्न हुए का बारहवें दिन का श्राद्ध करके त्रयोदशाह


* अपने २ वर्ण की एक २ स्त्री से विवाह करना धर्मशास्त्रानुकूल उत्तम पक्ष है। और स्ववर्ण की वा अन्य वर्ण की एक से अधिक स्त्रियों के साथ विवाह करना कामी जनों को व्यभिचार से बचाने के लिये मध्यम पक्ष है।