भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

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पृष्ठ 474

भाषार्थसंहिता ॥ ९

श्राद्धद्वादशकंकृत्वा श्राद्धे प्राप्तेत्रयोदशे ॥ १२ ॥
सपिण्डीकरणेचार्हेन्नचशूद्रःकथञ्चन ।
तस्मात्सर्वप्रयत्नेन शूद्रांभार्यांविवर्जयेत् ॥ १३ ॥
पाणिर्ग्राह्यस्सवर्णासु गृह्णीयात्क्षत्रियाशरम् ।
वैश्याप्रतोदमादद्याद्वेदेनेत्वग्रजन्मनः ॥ १४ ॥
साभार्यायागृहेदक्षा साभार्यायापतिव्रता ।
साभार्यायापतिप्राणा साभार्यायाप्रजावती ॥ १५ ॥
लालनीयासदाभार्या ताडनीयातथैवच ।
ताडितालालिताचैव स्त्रीश्रीर्भवतिनान्यथा ॥ १६ ॥
इतिशांखेधर्मशास्त्रेचतुर्थोऽध्यायः ॥ ४ ॥

पञ्चसूनागृहस्थस्य चुल्लीपेषण्युपस्करः ।
कण्डनीचोदकुम्भश्च तस्यपापस्यशान्तये ॥ १ ॥
पञ्चयज्ञविधानन्तु गृही नित्यंनहापयेत् ।


श्राद्ध के दिन अवश्य सपिण्डीकरण करे ॥ १२ ॥ द्विज कुल में पैदा हुआ शूद्र कदापि सपिण्डी करने योग्य नहीं है. तिस से संपूर्ण यत्न से शूद्रा स्त्री से कदापि विवाह न करे ॥ १३ ॥ ब्राह्मण के साथ ब्राह्मणी के विवाह में ब्राह्मणी का हाथ, क्षत्रिया बाण को, वैश्या प्रतोद (पैना) को ग्रहण करे ॥ १४ ॥ जो घर के कामों में चतुर हो, जो पतिव्रता हो, वा जिस के प्राणपति में बसते हों, और जो पुत्रादि सन्तानों वाली हो, वही उत्तम भार्या है ॥ १५ ॥ भार्या को सदैव लालना (लाड़) करे और अनुचित पर ताड़ना भी करे क्योंकि लालना और ताड़ने से ही वह स्त्री लक्ष्मी होती है अन्यथा नहीं ॥ १६ ॥

यह शंखस्मृति के भाषानुवाद में चौथा अध्याय पूरा हुआ ॥ ४ ॥

गृहस्थ पुरुष को ये पांच प्रकार की हत्या नाम दोष प्रति दिन लगता है कि चूल्ही, चक्की, मार्जनी, (बुहारी) कण्डनी (ओखली) और जल का घड़ा, उस हत्यारूप पाप की शान्ति के लिये ॥ १ ॥ गृहस्थ पुरुष पांच महायज्ञों को प्रतिदिन न त्यागे, क्योंकि पांच महायज्ञों के करने से गृहस्थ का उन