भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

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भाषार्थसहिता ॥ २७

अघमर्षणंदेवकृतं शुद्धवत्यस्तरत्समाः । कूष्माण्ड्यःपावमान्यश्च सावित्र्यश्चतथैवच ॥ १ ॥ त्र्यभिष्वंद्रुपदाञ्चैव, स्तोमानिव्याहृतीस्तथा । भारुण्डानिचसामानि गायत्रीचौशनंतथा ॥ २ ॥ पुरुषवृतंचभाषंच तथासोमव्रतानिच । अब्लिङ्गंबार्हस्पत्यंच वाक्सूक्तममृतंतथा ॥ ३ ॥ शतरुद्रीयमथर्वशिरस्त्रिसुपर्णंमहाव्रतम् । गोसूक्तमश्वसूक्तंच इन्द्रसूक्तंचसामनी ॥ ४ ॥ त्रीण्याज्यदोहानिरथन्तरंच अग्निव्रतंवामदेवव्रतंच । एतानिगीतानिपुनन्तिजन्तून् जातिस्मरत्वंलभतेयदिच्छेत् ॥ ५ ॥

इति श्रीशाङ्खे धर्मशास्त्रे एकादशोऽध्यायः ॥ ११ ॥ इतिवेदपवित्राण्यभिहितानि । एभ्यस्सावित्री विशिष्यते ॥ १ ॥


अघमर्षण. (ऋतं च सत्यं चा० ऋ० ८।८।४८) इत्यादि तीन ऋचा, (देवकृतस्यैनसो० यजु० ८।१३) इत्यादि पूरी एककण्डिका कः मन्त्र,— शुद्धवती (एतान्विन्द्रंस्तवाम० ऋ० मं० ८। सू० ९४।१-९) इत्यादि तीन ऋचा (तरत्समन्दी धा० ऋ० अ० ७। अ० १।१९) इत्यादि चार ऋचा — कूष्मांडी ऋचा, ऋ० मण्डल ९ (स्वादिष्ठया०) इत्यादि अन्त तक ११३ पवमान सूक्त — और सावित्री सविता देवतावाले (विश्वानिदेवसवितः०) इत्यादि मन्त्र ॥ १ ॥ द्रुपदादिव मुमुचानः० शु० यज् ० २०।२०) स्तोम, व्याहृती, भारुण्डसामगान,— गायत्री और उशना का मन्त्र ॥ २ ॥ पुरुषसूक्त, भाष, सोमव्रत, जल देवता वाले मन्त्र बृहस्पति देवता के मन्त्र, वागम्भृणी सूक्त, अमृत सूक्त ॥ ३ ॥ शतरुद्रीय अध्याय (नमस्ते रुद्र०) इत्यादि, अथर्व शिर, त्रिसुपर्ण, महाव्रत, गोसूक्त, अश्वसूक्त, दोनो साम ॥ ४ ॥ तीनों आज्य दोह, रथन्तर अग्निव्रत, वामदेव व्रत, ये अघमर्षण आदि सब गाने (पढ़ने) से जीवों को पवित्र करते हैं और जो इच्छा करे वह इनके जपसे पूर्व जन्म में मैं किस जाति में और किस देश में उत्पन्न हुआ था यह जान लेता है ॥ ५ ॥

यह शंखस्मृति के भाषानुवाद में ग्यारहवां अध्याय पूरा हुआ ॥
ये सब वेद में पवित्र मन्त्र कहे हैं। इन सब में गायत्री श्रेष्ठ है ॥ १ ॥