भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

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भाषार्थसहिता ॥ ३९

नामधारकविप्रस्तु दशाहेनविशुध्यति ॥ २ ॥ क्षत्रियोद्वादशाहेन वैश्यःपक्षेणशुध्यति । मासेनतुतथाशूद्रः शुद्धिमाप्नोतिनान्तरा ॥ ३ ॥ रात्रिभिर्मासतुल्याभिर्गर्भस्त्रावेविशुध्यति । अजातदन्तबालेतु सद्यःशौचंविधीयते ॥ ४ ॥ अहोरात्रात्तथाशुद्धिर्बालेत्वकृतचूडके । तथैवानुपनीतेतु त्र्यहाच्छुध्यन्तिबान्धवाः ॥ ५ ॥ अनूढानांतुकन्यानां तथैवशूद्रजन्मनाम् । अनूढभार्यःशूद्रस्तु षोडशाद्वत्सरात्परम् ॥ ६ ॥ मृत्युंसमधिगच्छेच्चेन्मासात्तस्यापिबान्धवाः । शुद्धिसमधिगच्छेयुर्नात्रकार्याविचारणा ॥ ७ ॥ पितृवेश्मनियाकन्या रजःपश्यत्यसंस्कृता । तस्यांमृतायांनाशौचं कदाचिदपिशाम्यति ॥ ८ ॥ हीनवर्णान्तुयानारी प्रमादात्प्रसवंव्रजेत् । प्रसवंमरणेतज्जमाशौचंनोपशाम्यति ॥ ९ ॥


मात्र से ब्राह्मण कहाने वाला दश दिन में शुद्ध होता है ॥ २ ॥ क्षत्रिय बारह दिन में, वैश्य एक पक्ष १५ दिन में और शूद्र एक मास में शुद्धि को प्राप्त होता है, पहिले नहीं ॥ ३ ॥ जितने महिने का गर्भ गिर जावे, उतने ही दिन में शुद्धि होती है और बालक के दांत उगने से पहिले मर जाने पर उसी समय शुद्धि कही है ॥ ४ ॥ मुण्डन से पहिले बालक के मरने पर एक दिन रात में और यज्ञोपवीत से पहिले मरने पर तीन दिन में, कुटुम्बी लोग शुद्ध होते हैं ॥ ५ ॥ बिना विवाही कन्या, शूद्रास्त्री, और बिना विवाहा शूद्र, सोलह वर्ष की अवस्था से ऊपर, इन के मरने पर उस मृतक के कुटुम्बी लोग एक महीने में शुद्ध होते हैं, इस में विचार नहीं करना चाहिये ॥ ६ । ७ ॥ यदि बिना विवाही कन्या पिता के घर पर ही रजस्वला हो जाय, तो उसके मरने का अशौच जन्म पर्यन्त कभी भी निवृत्त नहीं होता ॥ ८ ॥ यदि नीच वर्ण की कन्या विवाह से पहिले प्रसूता होते समय मर जाय, तो उस के प्रसव और मरण के दोनों सूतक जन्म पर्यन्त कभी भी निवृत्त नहीं होते ॥ ९ ॥