अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 506, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ें४१ शङ्खस्मृतिः ॥
समानं खल्वशौचन्तु प्रथमेन समापयेत् ।
असमानं द्वितीयेन धर्मराजवचो यथा ॥ १० ॥
देशान्तरगतः श्रुत्वा कुल्यानामरणोद्भवौ ।
यच्छेषं दशरात्रस्य तावदेवाशुचिर्भवेत् ॥ ११ ॥
अतीते दशरात्रे तु त्रिरात्रमशुचिर्भवेत् ।
तथा संवत्सरेऽतीते स्नानमेव विशुद्ध्यति ॥ १२ ॥
अनौरसेषु पुत्रेषु भार्यास्वन्यगतासु च ।
परपूर्वासु च स्त्रीषु त्र्यहाच्छुद्धिर्विधीयते ॥ १३ ॥
मातामहे व्यतीते तु आवापे च गतासुनि ।
गृहे दत्तासुकन्यासु सुतापुत्रेष्वहस्तथा ॥ १४ ॥
विद्राविते जनपदे जामातुर्दौहित्रके गृहे ।
आचार्यपत्निपुत्रेषु प्रेतेष्वेकदिनमेव च ॥ १५ ॥
मातुले पक्षिणी रात्रित्रिर्गणितोऽभ्यन्तरं चरेत् ।
यदि जन्म वा मरण के दो सूतक दस दिन के भीतर आगे पीछे हों जाँय तो पहिलेके समाप्त होने पर दूसरे जन्मसूतक समाप्त हो जायगा यदि असमान होय तो धर्मराज के वचनानुसार दूसरे के अन्त पर्य्यन्त शुद्धि करे ॥ १० ॥ परदेश में गया मनुष्य दश दिन के बीच में अपने कुल के हरण मरण को सुन कर दश दिन में शेष रहे दिनों तक अशुचि रहे ॥ ११ ॥ यदि दश दिन बीतने पर सुने तो तीन दिन में और एक वर्ष बीतने पर सुने तो तत्काल सचैल स्नान करने से ही शुद्धि होती है ॥ १२ ॥ आत्मज भिन्न (दत्तक आदि) पुत्रों के व्यभिचारिणी और जो अपने पति को छोड़ कर दूसरे को करने वाली स्त्री इनके मरने पर भी तीन दिन में शुद्धि होती है ॥ १३ ॥ नाना आचार्य और विवाहित कन्या इनके मरने पर भी तीन दिन में शुद्धि होती है ॥१४॥ देशके राजा के मरने अपने घरमें दौहित्र के जन्मने पर गुरु की पत्नी, और पुत्री के मरने पर एक दिन में शुद्धि होती है ॥ १५ ॥ मामाके मरने पर एक दिन रात शिष्य ऋत्विक् और सात पीढ़ी से पृथक् कुटुम्बी इन के मरने पर एक दिन रात अशुद्धि माने । सब्रह्मचारी ( जो संग में वेद पढ़ा हो ।