भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

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भाषार्थसंहिता ॥ ४३

अम्लोदकेनताम्रस्य सीसस्यत्रपुणस्तथा ॥ ३ ॥
क्षारेणशुद्धिः कांस्यस्य लोहस्यचविनिर्दिशेत् ।
मुक्तामणिप्रवालानां शुद्धिःप्रक्षालनेनतु ॥ ४ ॥
अब्जानांचैवभाण्डानां सर्वस्याश्ममयस्यच ।
शाकवर्जमूलफल द्विद्लानांतथैवच ॥ ५ ॥
मार्ज्जनाद्यज्ञपात्राणां पाणिना यज्ञकर्मणि ।
उष्णाम्भसातथाशुद्धिं सस्नेहानाविनिर्दिशेत् ॥ ६ ॥
शयनासनयानानां स्फ्यशूर्पशकटस्यच ।
शुद्धिःसंमोक्षणाद्यज्ञे कटामिन्धनयोस्तथा ॥ ७ ॥
मार्जनाद्वेश्मनांशुद्धिः क्षितेःशोधस्तुतक्षणात् ।
सम्मार्जितेनतोयेन वाससांशुद्धिरिष्यते ॥ ८ ॥
बहूनांप्रोक्षणाच्छुद्धिर्धान्यादीनांविनिर्दिशेत् ।
प्रोक्षणात्संहतानांच दारुवाणांचतक्षणात् ॥ ९ ॥
सिद्धार्थकानांकल्केन शुद्धेद्दन्तमयस्यच ।
गोवालैःफलपात्राणामस्थ्नां शृङ्गवतांतथा ॥ १० ॥


पात्रादि की शुद्धि होती है ॥ ३ ॥ कांसे और लोह के पात्रादि की शुद्धि खारे जल से और मोती, मणि, मूंगा, इन की शुद्धि जल से धोने मात्र से ही जाती है ॥ ४ ॥ जल के विकारों से पैदा हुए वस्तु, सब प्रकार के पत्थर के पात्र, शाक को छोड़ कर, मूल, फल, और उड़द, मूंग आदि दाल वाले इन सब की शुद्धि धोने से होती है ॥ ५ ॥ यज्ञ कर्म में यज्ञ के पात्रों की मांजने से और चिकने पात्रों की गर्म जल से शुद्धि कही है ॥ ६ ॥ शय्या, आसन, सवारी, सूप, शकट (गाड़ी) चटाई, इन्धन, इन की यज्ञ में जल छिड़कने से शुद्धि होती ॥ ७ ॥ बुहारने से घरों की और उसी समय छील देने से पृथिवी की और जल के मार्जन से वस्त्रों की शुद्धि होती है ॥ ८ ॥ बहुत से अन्नादि राशि की संहत (मिले हुए) पदार्थों की छिड़कने से और काष्ठ के पात्रों की शुद्धि छील देने से होती है ॥ ९ ॥ सींग और हाथी के दांत आदि से बने वस्तुओं की शुद्धि ओषधियों के उबाले रस से और फल से बने पात्र, हाड़ और सींग वाले वस्तुओं की शुद्धि गौ के चंवर से होती है ॥ १० ॥