भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

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४३ | शंखस्मृतिः ॥

निर्यासानांगुडानांच लवणानांतथैवच । कुसुंभकुंकुमानांच ऊर्णाकार्पासयोस्तथा ॥ ११ ॥ प्रोक्षणात्कथिताशुद्धिरित्याहभगवान्यमः । भूमिष्ठमुदकंशुद्धं शुचितोयंशिलागतम् ॥ १२ ॥ वर्णगन्धरसैर्दुष्टैर्वर्जितंयदि तद्भवेत् । शुद्धंनदीगतंतोयं सर्वदैवनथाकरः ॥ १३ ॥ शुद्धंप्रसारितंपण्यं शुद्धेचाजाश्वयोर्मुखे । मुखवर्जंतुगौःशुद्धा मार्जारश्चाक्रमेशुचिः ॥ १४ ॥ शय्याभार्याशिशुर्वस्त्रमुपवीतंक्रमण्डलुः । आत्मनःशुचितंशुद्धं नशुद्धिःपरस्यच ॥ १५ ॥ नारीणांचैववत्सानां शकुनीनांशुनांमुखम् । रात्रौप्रस्रवणेवृक्षे मृगयायांसदाशुचि ॥ १६ ॥ शुद्धाभर्तुश्चतुर्थेऽन्हि स्नानेनस्त्रीरजस्वला । दैवेकर्मणिपित्र्येच पञ्चमेऽह्नि विशुद्ध्यति ॥ १७ ॥ रथ्याकर्दमतोयेन ष्ठीवनाद्येनवाप्यथ ।


गोंद, गुड़, लवण, कुसुम्भ, ऊन, और कपास इन की ॥११॥ शुद्धि भी भगवान् यमराजने छिड़कने से कही है। पृथिवीके शुद्ध स्थल में और शिला पर पड़ा जल स्वतः ही शुद्ध होता है ॥१२॥ यदि वह भूमिस्थ जल दुष्ट वर्ण, बुरा रस, और बुरे गंध से वर्जित हो, नदी का और आकर (खान) का जल सदा ही शुद्ध है ॥ १३ ॥ दूकान में फैली चीज़, बकरी और घोड़े का मुख भी शुद्ध है। मुख को छोड़कर गौके सब अंग शुद्ध हैं और आक्रमण (किसी जानवर को पकड़ के मार डालने) में बिलाव शुद्ध है ॥ १४ ॥ शय्या, स्त्री, बालक, वस्त्र, यज्ञोपवीत, कमण्डलु, ये सब अपने ही शुद्ध कहे हैं और अन्य के नहीं ॥१५॥ स्त्री, बछड़े, पक्षि, और कुत्ते का मुख, क्रमसे रात्रि में प्रस्त्रवण थन चूसने में, वृक्ष से फल गिरने में और शिकार करने में सदैव शुद्ध है ॥ १६ ॥ रजस्वला स्त्री चौथे दिन स्नान करके अपने पति के लिये और देवता वा पितरोंके कर्म में पाचवें दिन शुद्ध हुई मानी जावे ॥ १७ ॥ यदि मनुष्य की नाभि से ऊपर के