भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

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भाषासंहिता ॥ ११

मृत्तिकेप्रतिगृह्णामि प्रजयाचधनेनच ॥५०॥ नित्यंनैमित्तिकंकाम्यं त्रिविधंस्नानमुच्यते । तेषांमध्येतयन्नित्यं तत्पुनर्भिद्यतेत्रिधा ॥५१॥ मलापकर्षणंपूर्वं मन्त्रवत्तुजलेस्मृतम् । सन्ध्ययोरुभयोःस्नानं स्नानभेदाःप्रकीर्तिताः॥५२॥ मार्जनंजलमध्येतु प्राणायामोयतस्ततः । उपस्थानंततःपश्चाद् गायत्रीजपउच्यते ॥ ५३ ॥ सवितादेवतायस्या मुखमग्निरुदाहृतः । विश्वामित्रऋषिश्चन्दो गायत्रीसाविशिष्यते ॥ ५४ ॥ अङ्गारकदिनेप्राप्ते कृष्णपक्षेचतुर्दशी । यमुनायांविशेषेण नियतोनियताशनः ॥ ५५ ॥ यमायधर्मराजाय मृत्यवेचान्तकायच । वैंवस्वतायकालाय सर्वभूतक्षयायच ॥ ५६ ॥ औदुम्बरायदध्नाय नीलायपरमेष्ठिने ॥ वृकोदरायचित्राय चित्रगुप्तायवापुनः ॥ ५७ ॥ एकैकस्यतिलैर्मिश्रान् दद्यात्रीनष्टवाञ्जलीन् ।


प्रकार इन दो मन्त्रों को पढ़ के स्नान के लिये हाथ में मृत्तिका लेवे ॥५०॥ नित्य, नैमित्तिक, काम्य, तीन प्रकार का स्नान कहा है । इन तीनों में जो नित्य स्नान है, वहभी तीन प्रकार का होता है ॥ ५१ ॥ मलापकर्षाद्येस्नान, मंत्रों सहित जलाशय में स्नान, और दोनों संध्याओं के समय शुद्ध्यर्थ स्ना- न करना, ये तीनभेद नित्य स्नानके कहे हैं ॥५२॥ जलके बीच मार्जन, फिर जल में, अथवा बाहर प्राणायाम करे. फिर सूर्यनारायण का उपस्थान करके पश्चात् गायत्री का जप करना कहा है ॥ ५३ ॥ सविता, जिस का देवता, अग्नि जिस का मुख, विश्वामित्र, जिस के ऋषि, जो त्रिपाद् गायत्री छंद है, वह (तत्सवि- तुर्व०) गायत्री सर्वोत्तम है ॥ ५४ ॥ जब कभी कृष्णपक्ष की चतुर्दशी को मंग- लवार आजाय, उसी दिन थोड़ा नियत भोजन करने वाला सावधान जिते- न्द्रिय हुआ पुरुष अपसव्य हो कर विशेष कर यमुना नदी पर जाके (ओंय-