अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंअत्रिसमृतिः ॥ ३९
तृतीयेतूदकंकृत्वा चतुर्थे श्राद्धमाचरेत् ।
यस्यैकापिगृहेनास्ति धेनुर्वत्सानुचारिणी ॥२१७॥
मंगलानिकुतस्तस्य कुतस्तस्यतमःक्षयः ।
अतिदोहातिवाहाभ्यां नासिकाभेदनेनवा ॥२१८॥
नदीपर्वतसंरोधे मृतेपादोनमाचरेत् ।
अष्टागवंधर्महलं षड्गवं व्यावहारिकम् ॥ २१९ ॥
चतुर्गवंनृशंसानां द्विगवंगववध्यकृत् ।
द्विगवंवाहयेत्पादं मध्यान्हेतुचतुर्गवम् ॥२२०॥
षड्गवंतुत्रिपादोक्तं पूर्णाहस्त्वष्टभिःस्मृतः ।
काष्ठलोष्टशिलागोघ्नः कृच्छ्रं सांतनं चरेत् ॥ २२१ ॥
प्राजापत्यंचरेन्मुष्ट्या अतिकृच्छ्रंतु आयसैः ।
तीसरे दिन जलदान करके चौथे दिन श्राद्ध करे-जिस के घर में एक भी गौ बछ-
ड़े वाली अर्थात् दूध देती न हो ॥२१७॥ उस के घर में मंगल कहां और अ-
न्धकार का नाश कहां अर्थात गृहस्थ के यहां गौ का रखना और उस की ठीक
२ सेवा करना अत्यावश्यक धर्म है ।-बहुत दूध निकालने बछड़े को न छोड़ने
वा बहुत कम छोड़ने से बहुत जोतने और नाक के छेदने से ॥ २१८ ॥ नदी
अथवा पर्वत में रोकने से जो पशु की मृत्यु हो जाय तो जितना उस पशु मा-
रने का प्रायश्चित्त कहा है उस की चौथाई प्रायश्चित्त करे-आठ हैं बैल जिस
पर ऐसा हल, धर्मानुकूल है । छः बैल का व्यवहार में मध्यम हल है ॥२१९॥
चार जिस पर बैल हों वह हल नृशंसों ( हत्यारों ) का है और दो बैल का
हल तो बैलों को मारने वाला है-दो बैल के हल को प्रातःकाल चौथाई दिन
में और चार बैल के को मध्यान्ह तक, ( आधे दिन ) चलावे २२० छे बैल
के को तीनपाद ( तीन पहर ) चलावे और आठ बैल के को संपूर्ण दिन चला-
ना धर्म शास्त्र में कहा है- लकड़ी ढेला-पत्थर इन से जो बैल वा गौकी
हत्या करे वह सांतपन कृच्छ्र करे २२१ मुष्टि ( मुक्का ) से जो गोहत्य करें वह