भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

पृष्ठ 563, कुल 805 में से

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भाषार्थसहिता ॥ २७

मृतकान्तेमृतोयस्तु सूतकान्तेचसूतकम् ॥ १४ ॥ एतत्संहतशौचानां पूर्वाशौचेनशुद्ध्यति । उभयत्रदशाहानि कुलस्यान्नंनभुज्यते ॥ १५ ॥ चतुर्थेऽहनिकर्तव्यमस्थिसंचयनंद्विजैः । ततःसंचयनादूर्ध्वमङ्गम्पर्शोविधीयते ॥ १६ ॥ वर्णानामानुलोम्येन स्त्रीणामेकोयदापतिः । दशाहषट्त्र्यहैकाहं प्रसवेसूतकंभवेत् ॥ १७ ॥ स्वस्थकालेत्विदंसर्वमशौचं परिकीर्तितम् । आपद्गतस्यसर्वस्य सूतकेऽपिनसूतकम् ॥ १८॥ यज्ञेप्रवर्तमानैतु जायेतार्थम्रियेतवा । पूर्वसंकल्पितेकार्ये नदोषस्तत्रविद्यते ॥ १९ ॥ यज्ञकालेविवाहेच देवयागेतथैवच । हूयमानेतथाचाग्नौ नाशौचं नापिसूतकम् ॥ २०॥ इति दाक्षे धर्मशास्त्रे षष्ठोऽध्यायः ॥ ६ ॥


मरण सूतक का समय पूरा न होने तक जो अन्य कोई मरे अथवा ऐसे ही जन्म सूतक में अन्य जन्म हो जाय तो ॥१४॥ इन मिले हुए सूतकों में पूर्व सूतक के शेष दिनों में दोनों की एक साथ शुद्धि हो सकती है। दोनों सूतकों में दश दिन तक सूतक वाले कुल का अन्न न खावे ॥ १५ ॥ मरण के बाद चौथे दिन विद्वान् द्विज अस्थि संचयन करे। फिर अस्थि संचयन के पीछे सूतक वालों के शरीर का स्पर्श कहा है ॥ १६ ॥ वर्णों के अनुलोम क्रमसे यदि स्त्रियों का पति एक होय तो, ब्राह्मणी, क्षत्रिया, वैश्या, शूद्रा, इन ब्राह्मण की चारों स्त्रियों को क्रम से दश, छः, तीन, एक, दिन का प्रसव में सूतक लगता है ॥१७॥ यह सब सूतक का विचार स्वस्थदशा में कहा है और आपत्तिकाल में सूतक के समय में भी सूतक नहीं लगता ॥ १८ ॥ यज्ञ का आरम्भ होजाने के समय यदि कोई जन्मे वा मरे तो, पूर्व जिस यज्ञ का संकल्प हो गया है उस को करने में दोष नहीं है ॥ १९ ॥ यज्ञ के समय, विवाह में प्रतिष्ठादि देवपूजन में, अग्निहोत्र में, मरण और जन्म दोनों के सूतक नहीं लगते ॥२०॥

यह दक्षस्मृति के भाषानुवाद में छठा अध्याय पूरा हुआ ॥६॥

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