अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 609, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ेंभाषाधर्मसंहिता ॥ ३१
नस्वी राजा न शारीरो ब्राह्मणदण्डः कर्म्मवियोगविख्यापन- विवासनाङ्ककरणान्यप्रवृत्तौ प्रायश्चित्ती स चौरसमः, स- चिवो मतिपूर्वं प्रतिगृहीतोप्यधर्म्मसंयुक्ते पुरुषशक्त्यपरा- धानुबन्धविज्ञानाद्दण्डनियोगोऽनुज्ञानं वा वेदवित्समवाय- वचनाद्वेदवित्समवायवचनात् ॥ २ ॥
इति गौतमीये धर्मशास्त्रे द्वादशोऽध्यायः ॥ १२ ॥
विप्रतिपत्तौ साक्षिणि मिथ्यासत्यव्यवस्था बहवः स्यु- रनिन्दिताः स्वकर्म्मसु प्रात्ययिका राज्ञां च निष्प्रीत्यनभितापा- श्चान्यतरस्मिन्नपि शूद्रा ब्राह्मणस्त्वब्राह्मणवचनादनुरो- ध्योऽनिबन्धश्चेन्नासमवेतापृष्टाः प्रब्रूयुरवचनेऽन्यथावचने च
छूट जाता है। राजा यदि न मारे तो अपराधी होता है। ब्राह्मण को मार- डालने का दण्ड नहीं होना चाहिये। इसलिये राजा को चाहिये कि उसे ब्राह्मण के वेदाध्ययनादि कामों से वियुक्त करे, महापातकी होने का विज्ञा- पन देवे, वा देश निकाले का दण्ड देवे अथवा दाग देकर सुवर्ण की चोरी का चिह्न करदेवे। यदि राजा इन में से कुछ भी न करे तो चोर के समान अ- पराधी होता है। मन्त्री को विचार पूर्वक परीक्षा करके नियत करने पर भी पीछे अधर्म संयुक्त प्रतीत हो तो पुरुष शक्ति के अपराध का परिणाम सोच कर मन्त्री को भी दण्ड देवे। अथवा वेदवेत्ताओं के सम्बन्धी वचन वा आज्ञा से उस को दण्ड न दे कर मन्त्री पद से च्युत करने की आज्ञा देवे ॥ २ ॥ यह गौतमीय धर्मशास्त्र के भाषानुवाद में बारहवां अध्याय पूरा हुआ ॥१२॥ किसी मामले में परस्पर विरुद्ध दोनों पक्ष प्रतीत होते हों तो झूठ सत्य का निर्णय साक्षी पर जाने। वे साक्षी लोग अपने २ धर्म कर्म में श्रद्धा विश्वास रखने वाले लोक में प्रतिष्ठित हों निन्दित न हों। राजा के साथ जिनका न प्रेम हो न डरते हों तथा वादी प्रतिवादी दोनों में किसी से जिनका विशेष मेल न हो न विरोध हो ऐसे बहुत मनुष्य साक्षी हों। किसी पक्ष में भले ही शूद्र भी साक्षी हों। ब्राह्मण से भिन्न साक्षी के वचन की अपेक्षा ब्राह्मण साक्षी के कथन का विशेष अनुरोध करे। यदि साक्षियों में परस्पर मेल हो तो पृथक् २ पूछे बिना साक्षी लोग कुछ न कहें। साक्षी लोग अदालत में कुछ भी न कहें वा मिथ्या