अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 610, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ें| ३८ | गौतमस्मृतिः ॥ |
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दोषिणः स्युः, स्वर्गः सत्यवचने विपर्यये नरकः ॥ १ ॥ अनिबन्धैरपि वक्तव्यं पीडाकृते निबन्धः प्रमत्तोक्ते च साक्षिसभ्यराजकर्तृषु दोषो धर्मतन्त्रपीडायां शपथैर्नैके सत्यकर्मणा तद्देवराजब्राह्मणसंसदि स्यादब्राह्मणानां पञ्च पश्वनृते साक्षी दश हन्ति गोऽश्वपुरुषममिषु दशगुणोत्तरान् सर्वं वा भूमौ हरणे नरको भूमिवदप्सु मैथुनसंयोगे च पशुवन्मधुसर्पिषो, गोवद्वस्त्रहिरण्यधान्यब्रह्मसु यानेष्वश्ववन्मिथ्यावचने याप्यो दण्ड्यश्च साक्षी नानृतवचने दोषो जीवनं चेत्तदधीनं नतु पापीयसो जीवनं राजा प्राड्विवाको ब्राह्मणो वा शास्त्रवित्।
कहें तो दोनों हालत में दोषी होते हैं। सत्य बोलने पर साक्षियों को स्वर्ग और मिथ्या बोलने से नरक प्राप्त होता है ॥१॥ कुछ प्राप्ति का निबन्ध न होने पर भी साक्षी ठीक देनी चाहिये। निबन्ध, पीड़ा (दुःख) करने वाला होता है। प्रमाद से मिथ्या कहने से राजसभा में अन्याय होतो साक्षी सभासद्, राजा और अधर्म करने वाला ये चारों अपराधी होते हैं। किन्ही आचार्यों का मत है कि धर्म को धक्का लगने का भय होतो शपथ (कसम) से निश्चय करे। सत्य धर्म कर्म की कसम ब्राह्मण से करावे सो देवस्थान राजसभा और ब्राह्मणों की सभा में शपथ करावे। ब्राह्मण से भिन्न साक्षियों से कहे कि-जो पुरुष पशुओं विषयक गवाही में झूठ बोलता है वह अपने कुल की पांच हत्या का दोषी होता, गौ के विषय में झूठ बोलने पर दश हत्या का दोषी, घोड़े के विषय में झूठ बोलने पर सौ हत्या का, मनुष्य के विषय में हजार हत्या का, और भूमि के विषय में झूठ बोलने पर दशहजार हत्या का दोषी होता है। अथवा भूमि विषयक झूठ में सब कुटुम्ब की हत्या का दोषी होता। भूमि के चुराने पर नरक होता और भूमि विषयक झूठ गवाही के तुल्य जल के विषय में और मैथुन संयोग के विषय में मिथ्या गवाही देने से दोष लगता है। शहद और घी के विषय में पशुओं के तुल्य, वस्त्र, सुवर्ण, अन्न, और वेद विषय में गौ के तुल्य, सवारियों (रथादि) के विषय में घोड़े के तुल्य दोष लगता है। यदि गवाह मनुष्य का मिथ्या कहना सिद्ध हो जावे तो उसे निकाल देवे और दण्ड करे। यदि उस मनुष्य की गवाही देने से ही जीविका होतो मिथ्या भाषण में भी राजदण्ड का अपराधी नहीं है। परन्तु ऐसे पापी गवाह की जीविका भी वास्तव में जीविका नहीं है। राजा (हाकिम) वकील,