अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 612, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ें४० | गौतमस्मृतिः ॥
चतुर्णां पिण्डनिवृत्तिः सप्तमे पञ्चमे वा, जननेप्येवं माता- पित्रोस्तन्मातुर्वा गर्भमाससमारात्रीः संसने गर्भस्य त्र्यहं वा श्रुत्वा चोर्ध्वं दशम्याः पक्षिण्यसपिण्डेयोनिसंबन्धे सहाध्या- यिनि च सब्रह्मचारिण्येकाहं श्रोत्रिये चोपसंपन्ने प्रेतोपस्प- र्शने दशरात्रमाशौचमभिसंधायचेदुक्तं वैश्यशूद्रयोरार्तवोर्वा पूर्वयोश्च त्र्यहं वाऽऽचार्यतत्पुत्रस्त्रीयाज्यशिष्येषु चैवमव- रश्चेत्पूर्वं वर्णमुपस्पृशेत् पूर्वो वाऽवरं तत्र शावोक्तमा- शौचं, पतितचाण्डालसूतिकोदक्याशवस्पृष्टितत्स्पृष्ट्युपस्प- र्शने सचैलोदकोपस्पर्शाच्छुध्येच्छवानुगमे च शुनश्च यदुपहन्यादित्येके,उदकदानं सपिण्डैः कृतचूडस्य तत्स्त्रीणां
द्धि से गिर कर अपनी इच्छा पूर्वक मरे हों उन को सातवें वा पांचवें वर्ष पिण्ड देना निवृत्त हो जाता है अर्थात् आगे उन के नाम से पिण्ड नहीं देना चाहिये । जन्म सूतक में भी इसी तरह मृतक के समान शुद्धि जानो । सन्तानोत्पत्ति में माता पिता दोनों को वा केवल माता को ही अशुद्धि लगती है । गर्भ पात होने पर जितने महीनों का गर्भ गिर जाय उतने दिन में शुद्धि करे । विदेश में दश दिन बाद सूतक जान पड़े तो तीन दिन में शुद्धि करे । यदि सपिण्ड से भिन्न कुटुम्बी वा नातेदारों का सूतक दश दिन बाद सुने तो दो दिन एक रात में शुद्धि करे । और साथ २ पढ़ने वाले वा साथ में जो ब्रह्मचारी रहा हो तथा श्रोत्रिय (वेदपाठी) के स्वर्गवास में एक दिन रात में शुद्धि करे । जान कर मुर्दा का स्पर्श करने वाला दश दिन सूतक माने । वैश्य शूद्रों का सूतक पूर्व में कहचुके हैं । रजस्वला स्त्रियां का तथा सूतकी ब्राह्मण क्षत्रियों का स्पर्श करके तीन दिन में शुद्धि करे । गुरु, गुरुपुत्र, गुरुपत्नी, यजमान और शिष्य के देहान्त में भी तीन दिन सूतक माने । सूतक में नीच वर्ण का पुरुष उत्तम वर्ण का वा उत्तम वर्ण नीच का स्पर्श करे तो मृत सूतक के समान अशुद्धि जानो । पतित (ब्रह्महत्यादि पातकी) चाण्डाल, सूतिका स्त्री, रजस्वला, मुर्दा का स्पर्श करने वाला और उस स्पर्श कर्त्ता का छूने वाला, इन पतितादि का स्पर्श करने पर सचैल स्नान करने पर शुद्ध होता है मुर्दा के संग जाने और हाथ से कुत्ते को मारने पर भी सचैल स्नान करे यह किन्ही आचार्यों का मत है । जिस का चूड़ाकर्म संस्कार हो गया हो उस के मरने