अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें४२ गौतमस्मृतिः ॥
वा कालनियमः शक्तितः प्रकर्षे गुणसंस्कारविधिरन्नस्य नवावरान् भोजयेदयुजो यथोत्साहं वा ब्राह्मणान् श्रोत्रियान् वाग्रूपवयःशीलसंपन्नान् युवभ्यो दानं प्रथममेके पितृवन्न च तेन मित्रकर्म कुर्यात्, पुत्राभावे सपिण्डा मातृसपिण्डाः शिष्याश्च दद्युस्तदभावे ऋत्विगाचार्यो॥ तिलमाषब्रीहियवोदकदानैर्मासं पितरः प्रीणन्ति, मत्स्यहरिणरुरुशशकूर्म्मवराहमेषमांसैः संवत्सरं, गव्यपयःपायसैर्द्वादश वर्षाणि, वाध्रीणसेन मांसेन कालशाकलोहखड्गमांसैर्मधुमिश्रैश्चानन्त्यम् ॥१॥ न भोजयेत् स्तेनकलीवपतितनास्तिकतद्वृत्तिवीरहाग्रेदि-
काल का नियम और अन्न को विशेष शुद्धि सावधानी से बनाने का विचार तो विशेष कर मानना चाहिये । श्राद्ध में नौ से कम १ । ३ । ५ । ७ ऐसे विषम संख्या वालों को वा वाणी, रूप, अवस्था, और स्वभाव जिनके अच्छे हों ऐसे वेदपाठी श्रोत्रियब्राह्मणों को अपनी शक्ति उत्साह के अनुसार भोजन करावे। कोई आचार्य कहते हैं कि जो युवावस्था में मरे हों उनके नाम के ब्राह्मणों को पहिले जिमावे। जिन ब्राह्मणों का श्राद्ध में पूजन करे उनके साथ मित्रवत् बराबरी का व्यवहार कभी न करे किन्तु उनका सदा पूज्यमाना करे। जिन के कोई पुत्र न हों उन के लिये अपने सपिण्डा या माता के सपिण्डा अथवा शिष्य लोग श्राद्ध करें। यदि इन में भी कोई न हो तो ऋत्विक् वा गुरु उनका श्राद्ध करें। तिल माष ( उड़द ) धान, जौ और जल से किये श्राद्ध से एक मास तक पितर तृप्त होते, मछली, हिरण, रोज, शश ( खरगोश, ) कछुआ, भैंसा, और मेढ़ा इनके मांस से एक वर्षतक, गौ के दूध, पायस ( खीर ) और बड़े २ कानों वाले बकरे के मांस से बारह वर्षतक, उन २ ऋतु के शाक, लाल बकरा, गैंडा, इनके शहद मिले मांस के पिण्डों से अनन्त कालतक पितरों की तृप्ति होती है ॥ १ ॥ ( जिस द्विज लोगों के लिये मांस खाने का निषेध है उनके लिये मांस के पिण्ड देने का भी निषेध ही जानो । क्योंकि ( यदन्नःपुरुषोभवतितदन्नास्तस्य देवताः ) जिस २ अन्न को जो २ खाता हो वही अपने २ देवों तथा पितरों को देवे यह परम सिद्धान्त है । इस के अनुसार ( निषेध होने पर भी ) जो मांसाहारी हैं उन्हीं को युगान्तरों में भी मांस पिण्ड देने का विधान जानो । और कलिमें तो सभी के लिये मांस के पिण्डों का निषेध ही है ) चोर, नपुंसक, नास्तिक, नास्तिकता के कामों से जीविका करनेवाला, पतित, वीर पुरुष की