अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 617, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ेंभाषार्थसहिता ॥ ९५
श्रवणादि वार्षिकं प्रौष्ठपदीं वोपाकृत्याधीयीत छन्दां स्यर्ध पञ्चमासान् पञ्च दक्षिणायनं वा ब्रह्मचार्य्युत्सृष्टलोमा न मांसं भुञ्जीत द्वैमास्यो वा नियमो, नाधीयीत वायौ दिवा पांसुहरे कर्णश्राविणि नक्तं वाणभेरीमृदङ्गजगर्त्तशब्देषु च श्वशृगालगर्दभसंहादे लोहितेन्द्रधनुर्नीहारेष्वभ्रदर्शने चा- पत्तौ मूत्रित उच्चरिते निशासन्ध्योदकेषु वर्षति चैके वली- कसंतानआचार्य्यपरिवेषणे ज्योतिषोश्च भीतो यानस्थः श- यानः प्रौढपादः श्मशानग्रामान्तमहापथाशौचेषु पूतिगन्धा- न्तःशवदिताकीर्त्तिशूद्रसन्निधाने सूतके चोद्गारे ऋग्यजुषं च सामशब्दे यावदाकालिका निर्घातभूमिकम्पराहुदर्शनोल्का-
श्रावणी पौर्णमासी को वा भाद्रपद की पौर्णमासी को उपाकर्म करके साढ़ेचार महिने वा दक्षिणायन के पांच महिनों में सब बालों का मुण्डन करा के ब्रह्मचारी रहता हुआ नियम से वेदों को पढ़े। मांस न खावे। अथवा दो महिनेतक ही वेदाध्ययन का नियम करे। और निम्न लिखित समयों में वेद न पढ़े किन्तु वेदाध्ययन का अनध्याय रक्खे—दिन में आंधी (तूफान आवे) चले, रात के समय कानों में वायु का शब्द सुन पड़े, वाण, नक्कारा, मृदङ्ग, हाथी, और रोगी का चिल्लाना इन बाण आदि का शब्द होने पर, कुत्ता, शृगाल (गीदड़,) गधा, इन का शब्द होने पर, दिशाओं में लाली, इन्द्र धनुष, और कुहिरा पड़ा जबदीखे, वर्षा से भिन्न समय बादल होने पर, जब पेशाब करे वा शौच (मलवत्याग) करे तब शुद्धि करने से पहिले, रात में, दो सन्ध्याओं के समय, जल के बीच, कोई कहते हैं कि वर्षते समय भी, छप्पर (छादन) छावने उठाने के समय, जब गुरु के पास सभालगी हो, वा जब सूर्य चन्द्रमा के सब ओर घेरा खिंचा दीखे, ऐसे आंधी आदि के समय वेद का अनध्याय रक्खे। जब भय लगे, सवारी में बैठा, लेटा हुआ, और पग फैला के भी वेद को न पढ़े। श्मशान (मरघट) में, गांव नगर के समीप, जहां बहुत मनुष्य चलते हों ऐसे बड़े मार्ग के समीप, अशुद्धि के समय, जहां दुर्गन्ध अधिक हो, जिस ग्राममें मुर्दा पड़ा हो उसकी हद्द (सीमा) में, चाण्डाल तथा शूद्र के समीप, सूतक के समय, वमन करके वेद न पढ़े। सामवेद