भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

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४८ गौतमस्मृतिः ॥

शुक्तं केवलमदधि पुनःसिद्धं पर्युषितमशाकभक्ष्यस्नेहमांसम-
धन्युत्सृष्टपुंश्चल्यभिशस्तानपदेश्यदण्डिकतक्षकदर्यबन्धनिकार्चिकित्सकमृगयुवार्युच्छिष्टभोजिगणविद्विषाणामपाङ्क्ता-
नां प्राग्दुर्बलाद्वृथानाचमनोत्थानव्यपेतानि समासमा-
भ्यां विषमसमै पूजान्तरानर्चितं च गोश्च क्षीरमानर्दशा-
याः सतकेचाजामहिष्योश्च नित्यमाविकमपेयमौष्ट्रमेकशफं
च स्यन्दिनी यमसूसन्धिनीनां च याश्च व्यपेतवत्साः प-
ञ्चनखाश्चाशल्यकशशकश्वाविद्गोधाखड्गकच्छपाउभयतोद-
त्केशलोमैकशफकलविङ्कप्लवचक्रवाकहंसाः काककङ्कगृ-


टाय गया हो' फिर से पकाया, धरा हुआ ( बासी ), ये उक्त सब पक्वान्न अभक्ष्य हैं। परन्तु शाक, भक्षण के योग्य घी तेलादि स्नेह, मांस और मिष्टान्न ये घरे हुए भी अभक्ष्य नहीं हैं। जो अन्न किसी ने छोड़ वा फेंक दिया हो, निन्दितका, यह न ज्ञात हो कि यह किसके यहां का है, संन्यासीका, बढ़ई, कंजूस, कैदी, वैद्य, वधिक, वारी, जूठन खानेवाला, इन निन्दितादि का, चन्दे का, विद्वेषी ( शत्रुओं ) का और बिरादरी से छेके हुओं का अन्न अभक्ष्य है। अपने आश्रित या घरके रोगी आदि से पहिले भोजन न करे। जिस में से पंच महायज्ञ न हुए हों ऐसा वृथान्न, पांति में कोई भी अन्त का आचमन (ओ-ममृतापिधानमसि स्वाहा ) मन्त्र से कर ले तब वा कोई पांति में से उठ जावे तब वा जब पांति के लोग भोजन करना छोड़ देवें तब भी भोजन न करे। जहां बराबर वालों में पक्षपात से आदर की विषमता की जाय वा ऊंच नीचों का तुल्य आदर किया जाय वहां भी भोजन न करे। जहां पहिले की अपेक्षा आदर कम हो, वा आदर के साथ जहां भोजन न कराया जाय वहां भी न खावे। व्याने पर सूतक समय दश दिन के भीतर गौ भैंस तथा बकरी का दूध न खावे, भेड़ी, ऊंटनी, घोड़ी, ऋतुमती वा जिसका दूध थनों में से चूता हो, जो दो बच्चों से व्यावे, जो गर्भर्वार्तणी आदि हो और दूध देवे, जिस गौ आदि का बच्चा मरगया हो इन भेड़ी आदि का दूध न खाना चाहिये। सेही, शश (खरहा), गोधा ( गोह ), गैंठा, और कछुआ को छोड़कर बाकी पांच नखोंवाले, दोनों ओर दांतोंवाले, केशों के तुल्य बड़े २ लोमोंवाले, एक खुर वाले, कलविङ्क ( गवरापक्षी ) प्लव ( जल में तरनेवालेपक्षी ) चकवा, हंस, कौवा, कंक ( जिस के पंखों को बाण में लगाते हैं ) गीध, और श्येन पक्षी,