भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

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६० गौतमस्मृतिः ॥

ऽप्यग्निष्टुदन्तर्वोत्सुसृष्टश्चेदब्राह्मणवधे ॥२॥ हत्वाप्यात्रेयीं चत्र गर्भं चाविज्ञाते ॥३॥ ब्राह्मणस्य राजन्यवधे षड्‌वार्षिकं प्राकृतं ब्रह्मचर्यमृषभैकसहस्राश्च गा दद्यात् ॥४॥ वैश्ये त्रैवा- र्षिकं ऋषभैकशताश्च गा दद्यात्॥५॥ शूद्रे संवत्सरं ऋषभैकाद- शाश्च गा दद्यादनात्रेयीं चैवं गां च ॥६॥ शूद्रवन्मण्डूकन- कुलकाकाव्यश्वहरमूषिकांश्च ॥७॥ हिंसासु चास्थिमतां सहस्रं हत्वाऽनस्थिमतामनडुद्भारंच ॥८॥ अपिवाऽस्थिमतामेकैक- स्मिन् किंचित् किंचिद्दद्यात् ॥६॥ षण्डे च पलालभारः सीसमा- के सामने अपना दोष प्रकट करके सब के साथ स्नान करे तो पाप से छूट जाता है । १-यदि मार डालने की मनसा से न मारा हो और ब्राह्मण मर गया हो तो किसी यज्ञ में भीतरी ऋचा से अग्नि की स्तुति वा अग्निष्टुत् नामक यज्ञ करने से शुद्ध हो जाता है ॥ २ ॥ ब्रह्महत्या करने वाला इन सात प्रकार के प्रायश्चित्तों में से देश, काल, शक्ति और अपराध की योग्यता- नुसार कोई एक प्रायश्चित्त करे । ब्राह्मण पुरुष से ब्राह्मणी में स्थापित अ- ज्ञात ( जिस में स्त्री वा पुरुष के चिन्ह न प्रकट हुए हों ऐसे) गर्भ को और रजस्वला ब्राह्मणी के मार डालने पर भी यही उक्त प्रायश्चित्त है ॥ ३ ॥ यदि ब्राह्मण किसी क्षत्रिय का वध करे तो ब्रह्मचारी रहता हुआ छः वर्ष व्रत करे अथवा उक्त प्रायश्चित्तों में से आधा प्रायश्चित्त करे । तथा एक बैल और हजार १००० गौओं का दान करे ॥ ४ ॥ यदि ब्राह्मण किसी वैश्य को मार डाले तो ब्रह्मचर्य के सहित तीन वर्ष प्रायश्चित्त करके एक बैल तथा सौ गौ दक्षिणा में देवे ॥ ५ ॥ यदि ब्राह्मण किसी शूद्र का वध करे तो एक वर्ष प्रायश्चित्त और एक बैल दश गौ दक्षिणा में देवे । रजस्वला से भिन्न ब्राह्मणी के वध में भी यही व्रत करे तथा एक गौ एक बैल द- क्षिणा में देवे ॥ ६ ॥ मेंढक, न्योला, कौवा, भेड़, घोड़े को देकर वापस लेने वाला, और मूषिक इन को मारने पर शूद्र की हत्या में कहे प्रायश्चित्त करे ॥ ७ ॥ गिरगिटादि हड्डी वाले छोटे २ एक हजार १००० जीवों की हत्या करने और विना हड्डी वाले दंश मशकादि एक गाड़ी भर मारे तो शूद्र हत्या का व्रत करे ॥ ८ ॥ अथवा हड्डी वाले एक २ जीव की हत्या मध्ये किंचित् २ दान करे ॥ ९ ॥ नपुंसक जीव की हत्या में एक बोझा, पलाल एक माशा