भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

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भाषार्थसहिता ॥ ६१

षकञ्च वराहे घृतघटः सर्पे लोहदण्डः ब्रह्मबन्ध्वां च लल- नायां जीवो वैजिके न किंचित् तल्पान्नधनलाभबधेषु पृथक्व- र्षाणि द्वे परदारे त्रीणि श्रोत्रियस्य द्रव्यलाभे चोत्सर्गो यथा- स्थानं वा गमयेत् प्रतिषिद्धमनः संयोगे सहस्रवाक्चेदग्न्युत्सा- दिनिराकृत्युपपातकेषु चैवं स्त्रीचातिचारिणी गुप्ता पिण्डंतु ल- भेताप्यमानुषीषु गोवर्ज्जं स्त्रीकृते कूष्माण्डैर्घृतहोमो घृतहोमः १०

इति गौतमीये धर्मशास्त्रे त्रयोविंशोऽध्यायः ॥२३॥

सुरापस्य ब्राह्मणस्योष्णमासिञ्चेयुः सुरामास्ये मृतः


शीशा, सुअर के मारने में एक घड़ा घी, सांप के मारने में लोहे का डंडा, निन्दित कुलटा ब्राह्मणी के मारने पर भी लोह दण्ड का दान देवे। बीज सम्बन्धी जीव के भुंजा ने आदि द्वारा नाश होने पर कुछ प्रायश्चित्त नहीं है। शय्या, अन्न, धन के लेने देने में अज्ञान से किसी मनुष्य का मृत्यु होतो भिन्न २ यथोचित वर्षों प्रायश्चित्त होगा। परस्त्री की हत्या में दो वर्ष, वेदपाठी की स्त्री की हत्या में तीन वर्ष प्रायश्चित्त करे। कहीं पड़ा हुआ धन मिले तो धर्म खाते में उस का दान कर देवे अथवा ज्ञात होजाय कि अमुक का है तो उसीके घर पहुंचा देवे। शास्त्रविरुद्ध निषिद्ध कामों में जो मनको लगावे और वर्जने पर सहस्रों विरुद्ध बातें कहे, जिस ने स्थापित अग्नि का और वेदाध्ययन का त्याग किया हो। इत्यादि उपपातकों में और व्यभिचारिणी स्त्री ये उचित प्रायश्चित्त न करें तो घर से निकाल दिये जावें, खाने को भोजन भी इन को न मिले। पर जो स्त्री पीछे भी अपनी यथावत् रक्षा कर ले तो उस को अन्न भोजन मात्र मिला करे। मनुष्य स्त्री से भिन्न गौ को छोड़ के जो पुरुष अन्य पश्वादि से मैथुन करे वह कूष्माण्ड सूक्तों द्वारा अग्नि में घृत का होम प्रायश्चित्त करे ॥ १० ॥

यह गौतमीय धर्मशास्त्र के भाषानुवाद में तेईशवां अध्याय पूरा हुआ ॥२३॥

अब मद्य पीने का प्रयश्चित कहते हैं। मदिरा को अत्यन्त गर्म अग्निवर्ण कर के जानकर मद्यपीनेवाले ब्राह्मण के मुख में उसकी राय से प्रायश्चित्त देनेवाले लोग छोड़ें उससे मरकर वह शुद्ध होता है। यदि अज्ञान से मद्य पीलिया