अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें६२ गौतमस्मृतिः ॥
शुद्ध्येदमत्य़ा पाने पयो घृतमुदकं वायुं प्रति त्र्यहं तप्तानि स कृच्छ्रस्ततोऽस्य संस्कारः ॥ १ ॥ मूत्रपुरीषरेतसां च प्रा- शने श्वापदोष्ट्रखराणां चाङ्गस्य ग्राम्यकुक्कुटशूकरयोश्च ग- न्धाघ्राणे सुरापस्य प्राणायामो घृतप्राशनं च पूर्वैश्च दष्टस्य ॥ २॥ तल्पे लोहशयने गुरुतल्पगः शयीत सूमीं ज्वलन्तीं वा श्लिष्येल्लिङ्गं वा सवृषणमुत्कृत्याञ्जलावाधाय दक्षिणाप्रतीचीं दिशं व्रजेदजिह्ममाशरीरनिपातान्मृतः शुध्येत् ॥ ३॥ सखि- सयोनिसगोत्राशिष्यभार्यासु स्नुषायां गवि च गुरुतल्पस- मोऽवकरइत्येके, श्वभिःखादयेद्राजा निहीनवर्णगमने स्त्रियं
हो तो दूध, घी, जल, और वायु इन को तीन २ दिन गर्म कर २ पीवे इस बारह दिन के व्रत का नाम तप्त कृच्छ्र है । इस के बाद उस का फिर उपनयन सं- स्कार कराया जावे ॥ १ ॥ अज्ञान से विष्ठा, मूत्र, और वीर्य के खानेने पर भी वही तप्त कृच्छ्र और पुनःसंस्कार होना चाहिये । तथा श्वापद, ऊंट, गधा, गांव का मुरगा और गांव के सुवर का मांस खाने पर भी वही पूर्वोक्त प्रा- यश्चित्त जानो । यज्ञ करने वाले ब्राह्मण को यदि मद्य पीने वाले का गन्ध लगजाय तो तीन वार प्राणायाम करके गोघृत खावे तब शुद्ध होता है । तथा जिस को श्वापदादि काटे वह भी यही प्रायश्चित्त करे ॥ २ ॥ जिस ने गुरु पत्नी से गमन किया हो वह लोहे की खटिया को अत्यन्त गर्म करके उसपर लेटजावे । अथवा लोहेकी स्त्री बनवा के अग्निमें अत्यन्त तपाके उसको जोर से लिपट जावे । अथवा अण्डकोशों सहित उपस्थेन्द्रिय को काट के दोनों हाथ की अंजली में धरके दक्षिण पश्चिम के बीचकी नैऋत दिशाको जबतक शरीर न गिर जाय सीधा चला जावे लौट कर पीछे भी न देखे इस प्रकार मर जाने पर शुद्ध होता है ॥ ३ ॥ मित्र की पत्नी, सगी बहन, अपने गोत्र की स्त्री, और शिष्य की स्त्री, पुत्र वधू, और गौ इन से संयोग करना गुरुपत्नी के संयोग के तुल्य महापातक है । कोई आचार्य यह कहते हैं कि उक्त स्त्रियों से गमन करने वाले को कूड़ा करकट के समान त्याग देना योग्य है, फिर क- भी जाति पांक्ति में न लेवें । यदि उच्च कुलकी स्त्री अपने पतिका निरादर