अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 636, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ें६४ गौतमस्मृतिः ॥
ऽभ्यश्छर्दिनो घृतप्राशनं चाक्रोशानृतहिंसासु त्रिरात्रं परम्- न्तपःसत्यवाक्ये वारुणीपावमनीभिर्होमो विवाहमैथुननिर्मा- त्संयोगेष्वदोषमेकेऽनृतं न तु खलु गुर्वर्थेषु यतः सप्त पुरुषा- नितश्च परंश्च हन्ति मनसापि गुरोरनृतं वदन्नल्पेष्व- प्यपध्वन्त्यावसायिनीगमने कृच्छ्राब्दोऽमत्या द्वादशरात्रमु- दक्यागमने त्रिरात्रं त्रिरात्रम् ॥ ५ ॥
इति गौतमीये धर्मशास्त्रे चतुर्विंशतितमोऽध्यायः ॥२४॥
रहस्यं प्रायश्चित्तमविख्यातदोषस्य चतस्रऋचं तरत्सम- न्दीत्यप्सु जपेदप्रतिग्राह्यं प्रतिजिघृक्षन् प्रतिगृह्य वाऽभोज्यं बुभुक्षमाणः पृथिवीमावपेद्गत्वन्तराग्ममाण्डुकीपरस्पर्शा- च्छुद्धिमेके स्त्रीषु पयोव्रतो वा दशरात्रं घृतेन द्वितीयम्
अपराधी मनुष्य सत्य बोलने में परम तप वा पुण्य मानता हुआ सत्य कहे तो वरुण देवता वाली और पावमानी ऋचाओं से तीन दिन तक होम करे। विवाह और मैथुन की सिद्धि वा प्राप्ति के लिये मिथ्या भाषण में दोष नहीं यह किन्हीं आचार्यों का मत है। परन्तु गुरु के किसी छोटे प्रयोजन वा काम में भी झूठ न बोले क्योंकि आगे पीछे अपनी सात २ पीढ़ी कुल का वह मनुष्य नाश करता है कि जो गुरु से झूठ बोलता है। किसी अन्त्यज नीच स्त्री से जान कर संग करे तो एक वर्ष तक कृच्छ्रव्रत करे और बिना जाने संग करे तो बारह दिन तक कृच्छ्रव्रत करे। तथा रजस्वला स्त्री से गमन करे तो तीन दिन प्रायश्चित्त करे ॥ ५ ॥
यह गौतमीय धर्मशास्त्र के भाषानुवाद में चौबीसवां अध्याय पूरा हुआ ॥२४॥
जिस का दोष प्रसिद्ध न हुआ हो ऐसे गुप्त पापी का प्रायश्चित्त (ऋग्वेद अष्ट० ७ अ० १ । व० १५ तरत्समन्दी० ) इत्यादि चार ऋचाओं का जल में खड़े होकर जप करे। न लेने योग्य दान को लेना चाहता हुआ वा ले कर तथा अभक्ष्य वस्तु को खाना चाहता हुआ थोड़े जुते पृथिवी का दान करे। यदि ऋतु काल से भिन्न समय स्त्री में गमन करे तो कोई आचार्य स्नान करने मात्र से शुद्धि मानते हैं। स्त्रियों में गर्भपात करने पर पहिले दशदिन तक दूध का व्रत करे, फिर दूसरे दश दिन तक गोघृत ही खावे, फिर तीसरे दश दिन तक केवल जल पीके रहे। फिर प्रातःकाल दश दिन