भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

पृष्ठ 643, कुल 805 में से

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भाषाभाष्यसहिता ॥ ७१

पङ्‌क्तीश्च पुनाति संवत्सरमाप्त्वा चन्द्रमसः सलोकतामा- प्नोत्याप्नोति ॥ २ ॥ इति गौतमीये धर्मशास्त्रेऽष्टाविंशोऽध्यायः ॥ २८ ॥

ऊर्ध्वं पितुः पुत्रा ऋक्थं भजेरन् निवृत्ते रजसि मातुर्जीवति चेच्छति सर्व्वं वा पूर्व्वजस्येतरान्विभृयात् पितृवत् ॥ १ ॥ विभागे तु धर्मवृद्धिर्विंशतिभागो ज्येष्ठस्य मिथुनमुभयतो- दद्युक्तो रथो गोवृषः काणखोरकूटखञ्जा मध्यमस्यानेकश्चे- दविर्धान्यायसी गृहमनायुक्तं चतुष्पदाञ्चैकैकं यवीयसः समं चेतरत्सर्व्वं द्वयंशी वा पूर्व्वजः स्यादेकैकमितरेषामेकैकं वा धनरूपं काम्यं पूर्व्वः पूर्व्वो लभेत दशतः पशूनां नैकशफाने- कशफानां वृषभोऽधिको ज्येष्ठस्य ऋषभषोड़शा ज्येष्टिनेयस्य

में बैठ उस को पवित्र कर देता है। और एक वर्ष तक चान्द्रायण व्रत करे तो मरणानन्तर चन्द्रलोक सम्बन्धी स्वर्ग प्राप्त होता है ॥ २ ॥ यह गौतमीय धर्मशास्त्र के भाषानुवाद में अट्ठाईशवां अध्याय पूरा हुआ ॥२८॥

पिता का स्वर्गवास होने वा संन्यासादि द्वारा पृथक् होनेपर पुत्रलोग पिता के धनादि का विभागकर लेवें । अथवा पिताके जीवित विद्यमान रहते भी जब माता का रजोधर्म होना बन्द होजाय तब पिता की इच्छा वा आज्ञा हो तो विभाग करलें । अथवा ज्येष्ठ भ्राता सब धन का मालिक रहे और अन्य सब भाइयों का पिता के तुल्य भरण पोषण करे ॥ १ ॥ यदि सब भाई विभाग करें तो धर्मानुकूल ज्येष्ठ भाई को धनका वीसवां भाग, एकर घोड़ा घोड़ी युक्तरथ और एक बैल इतना अधिक मिलना चाहिये । काणा, लंगड़ा, और एक रुष्ट पुष्ट बैल मध्यम-( मझिले ) भाई को अधिक, यदि मझिले भाई कई हों तो भेड़ें, धान्य ( गेहूं आदि ) लोहे के वस्तु, और घर इनमें जो२ अधिक हों उन में से सब बीचके भाइयों को यथा सम्भव अधिक मिले और एकर बैल सहित गाड़ी छोटे को अधिक दी जावे । इनसे भिन्न जो सामान रहा वह सब को बराबर मिले। अथवा दो भाग ज्येष्ठ भाई लेवे तथा अन्य सबको एक२ भाग मिलें। अथवा छोटे२ भाई की अपेक्षा एक२ धनरूप-मूल्यवान् अंश बड़े२ सब को अधिक मिले। अथवा दश घोड़े और बैलों में से एक बैल ज्येष्ठ भाई को अधिक दिया जावे। सबसे बड़ी पिता की स्त्री के बड़े पुत्र को एक बैल तथा १५ अन्य पशु अधिक मिलें। अथवा उसकी बराबर हो उ-

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