अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 657, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ेंभाषार्थसहिता ॥ १९
मूकोभ्रातृवधेचैव तस्येयंनिष्कृतिःस्मृता ॥ ३२ ॥
तेनकार्यंविशुद्ध्यर्थं यतिचान्द्रायणं व्रतम् ।
व्रतान्तेपुस्तकंदद्यात्सुवर्णपलसंयुतम् ॥ ३३ ॥
इमंमन्त्रंसमुच्चार्य ब्रह्माणींतांविसर्जयेत् ।
सरस्वति ! जगन्मातः ! शब्दब्रह्माधिदैवते ! ॥ ३४ ॥
दुष्कर्म्मकारिणंपापं पाहिमांपरमेश्वरि ! ।
बालघातीचपुरुषो मृतवत्सःप्रजायते ॥ ३५ ॥
ब्राह्मणोद्वाहनंचैव कर्त्तव्यंतेनशुद्धये ।
श्रवणंहरिवंशस्य कर्त्तव्यंचयथाविधि ॥ ३६ ॥
महारुद्रजपंचव कारयेच्चयथाविधि ।
षडङ्गैकादशैरुद्रै रुद्रःसमभिधीयते ॥ ३७ ॥
रुद्रैस्तथैकादशभिर्महारुद्रःप्रकीर्तितः ।
एकादशभिरेतैस्तु अतिरुद्रश्चकथ्यते ॥ ३८ ॥
जुहुयाच्चदशांशेन पूर्वोक्ताज्याहुतीस्तथा ।
नरकान्त में मूक (गूगा) होता है उस का प्रायश्चित्त निम्न लिखित है ॥३२॥ उस को अपनी शुद्धि के लिये यतिचान्द्रायण (मध्यान्ह में एकबार एकमास तक आठ ग्रास भोजनरूप) व्रत करना चाहिये। फिर व्रतकी समाप्ति में चार तोला सुवर्ण सहित वेद की पुस्तक पर सरस्वती देवता का यथाविधि पूजन करके उस का दान करे ॥३३॥ फिर इस आगे लिखे मन्त्र (सरस्वति०) का उच्चारण करके सरस्वती देवी का विसर्जन करे कि हे शब्दब्रह्मरूप वेद की अधिष्ठात्री जगत् की माता परमेश्वरी सरस्वती ! दुष्कर्म करने वाले मुझ पापी की रक्षा करो ॥३४॥ बालक की हत्या करनेवाले पुरुष के सन्तान हो २ कर मर जाते हैं ॥३५ उसको अपनी शुद्धि के लिये ब्राह्मणों को कन्धेपर बैठा कर ले चलना आदि सेवा करनी चाहिये । और हरिवंशपुराण का विधिपूर्वक श्रद्धा से श्रवण करे ॥३६॥ और वह विधिपूर्वक महारुद्र जप करावे । षडङ्ग की ग्यारह रुद्री का पाठ रुद्र कहाता ॥ ३७ ॥ ग्यारह रुद्रों का (रुद्री के १२१ पाठ) महारुद्र कहाता और इन ग्यारह महारुद्रों का एक अतिरुद्र कहाता है ॥ ३८ ॥ महारुद्र वा