अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें१६ शातातपस्मृतिः ॥
मयूरघातनेचाथ जायतेकृष्णमण्डलम् ।
निष्कतत्रयमितोदेयस्तेनस्वर्णमयःशिखी ॥ ६८ ॥
हंसघातीभवेद्यस्तु तस्यस्याच्छ्वेतमण्डलम् ।
रौप्यंपलत्रयमितं हंसंदद्याद्विशुद्धये ॥ ६६ ॥
कुक्कुटेनिहतेचैव वक्रनासःप्रजायते ।
पारावतंससौवर्णं प्रदद्यान्निष्कमात्रकम् ॥ ७० ॥
शुकसारिकयोर्घाती नरःस्खलितवाग्भवेत् ।
सच्छास्त्रपुस्तकंदद्यात्सर्वापायसदक्षिणाम् ॥ ७१ ॥
वकघातीदीर्घनासो दद्याद्गांधवलप्रभाम् ।
काकघातीकर्णहीनो दद्याद्गामसितप्रभाम् ॥ ७२ ॥
हिंसायांनिष्कृतिरियं ब्राह्मणेसमुदाहृता ।
तदर्द्धार्द्धप्रमाणेन क्षत्रियादिष्वनुक्रमात् ॥ ७३ ॥
क्षत्रियोमृगयांचक्रे मृगान्निघ्नन्नदुष्यति ।
मोर के मारने पर कृष्ण मण्डल रोग होता है उस को तीन तोले सुवर्ण का मोर बनवा के दान करना चाहिये ॥ ६८ ॥ जो हंस की हत्या करे उस के जन्मान्तर में श्वेतमण्डल रोग होता है वह अपनी शुद्धि के लिये बारह तोला चांदी का हंस बनवा के दान करे ॥ ६९ ॥ मुर्गा की हत्या करने पर जन्मान्तर में टेढ़ी नासिका वाला होता है। वह एक तोला सुवर्ण का कबूतर बना के दान करे ॥ ७० ॥ तोता और मैना का मारनेवाला पुरुष गूंगा होता है। वह दक्षिणा सहित सत्शास्त्र के पुस्तक का दान ब्राह्मण को देवे ॥ ७१ ॥ बगुला का मारनेवाला बड़ीनाकवाला होता है वह श्वेत गौ का दान करे। कौवे का मारनेवाला बधिर (बहरा) होता वह काली गौ का दान करे ॥ ७२ ॥ यहां तक ब्राह्मण के लिये हिंसा का प्रायश्चित्त कहा गया है। उससे आधा क्षत्रिय को तथा चौथाई प्रायश्चित्त वैश्य को करना चाहिये ॥७३॥ क्षत्रिय पुरुष वन जङ्गल में मृगादि को शिकार करता हुआ दूषित नहीं होता। युद्ध के मैदान में प्राप्त जो क्षत्रिय उस का जो धर्म है उस से वह भले