अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 665, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ेंभावार्थसहिता ॥ १९
लक्षहोमंसकुर्वीत प्रायश्चित्तंयथाविधि ॥ ९ ॥
मन्दोदराग्निर्भवति सतिद्रव्येकदन्नदः ।
प्राजापत्यत्रयं कुर्याद् भोजयेच्चशतंद्विजान् ॥ १० ॥
विषदःस्याच्छर्दिरोगो दद्याद्दशपयस्विनीः ।
मार्गहापादरोगोस्यात्सोऽश्वदानंसमाचरेत् ॥ ११ ॥
पिशुनोनरकस्यान्ते जायतेश्वासकासवान् ।
घृतंतेनप्रदातव्यं सहस्रपलसम्मितम् ॥ १२ ॥
द्यूतोऽपस्माररोगीस्यात्तत्पापविशुद्धये ।
ब्रह्मकूर्चत्रयंकृत्वा धेनुंदद्यात्सदक्षिणाम् ॥ १३ ॥
शूलीपरोपतापेन जायतेतत्प्रमोचने ।
सोऽन्नदानंप्रकुर्वीत तथारुद्रंजपेन्नरः ॥ १४ ॥
दावाग्निदायकश्चैव रक्तातीसारवान्भवेत् ।
तेनोदपानंकर्त्तव्यं रोपणीयस्तथावटः ॥ १५ ॥
सुरालयेजलेवापि सकृद्विष्टांकरोतियः ।
घ्र करने से अजीर्ण रोगी होता है। वह विधिपूर्वक एक लाख आहुति गायत्री से घी मिले तिलों का होम करे ॥९॥ द्रव्य नाम धन सम्पत्ति अच्छी होने पर भी निकृष्ट अन्न का दान करने वाला मन्दाग्नि रोग युक्त होता है वह तीन प्राजापत्य व्रत करके सौ १०० ब्राह्मण जिमावे ॥ १० ॥ विष देने वाला जन्मान्तर में वमन रोगी होता है। वह दूध देती हुई दश गौओं का दान करे। मार्ग को नष्ट करने वाला पगों में रोगी होता है वह घोड़े का दान करे ॥ ११ ॥ चुगली निन्दा करनेवाला नरक भोग के अन्त में श्वास कास (दमा) का रोगी होता है उसको एक मन भर ४० सेर घी का दान करना चाहिये ॥१२॥ जुआ खेलने वाला मृगी रोग युक्त होता है वह उस पाप की शुद्धि के लिये पराशरस्मृति के ११वें अ० में कहे तीन ब्रह्म कूर्च व्रत करके दक्षिणा सहित दूध देने वाली गौ का दान करे ॥ १३ ॥ अन्यों को दुःख देने वाला जन्मान्तर में शूल रोग युक्त होता है वह उस को छुड़ाने के लिये अन्न का दान और रुद्रों का पाठ करे ॥ १४ ॥ वन में आग लगाने वाला रक्तातीसार (रुधिर के दस्त) रोग युक्त होता है वह वटका वृक्ष लगावे और प्याऊ बैठावे ॥ १५ ॥ देव मन्दिर में वा जलाशय में एक बार भी