अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें२० शातातपस्मृतिः ॥
गुदरोगोभवेत्तस्य पापरूपःसुदारुणः ॥ १६ ॥
मासंसुरार्चनेनैव गोदानद्वितयेनतु ।
प्राजापत्येनचैकेन शाम्यन्तिगुदजारुजः ॥ १७ ॥
गर्भस्तम्भकरीनारी काकवन्ध्याप्रजायते ।
तयाकार्यंप्रयत्नेन गोदानंविधिपूर्वकम् ॥ १८ ॥
गर्भपातनजारोगा यकृत्प्लीहजलोदराः ।
तेषांप्रशमनार्थाय प्रायश्चित्तमिदंस्मृतम् ॥ १९ ॥
एतेषुदद्याद्विप्राय जलधेनुंविधानतः ।
सुवर्णरूप्यताम्राणां पलत्रयसमन्विताम् ॥ २० ॥
प्रतिमाभङ्गकारीच व्रणकायःप्रजायते ।
संवत्सरत्रयंसिंचेदश्वत्थंप्रतिवासरम् ॥ २१ ॥
उद्वाहयेत्तमश्वत्थं स्वगृहोक्तविधानतः ।
तत्रसंस्थापयेद्देवं विघ्नराजंसुपूजितम् ॥ २२ ॥
दुष्टवादीखण्डितःस्यात्सर्वंदद्याद्विजातये ।
जो मल मूत्र त्याग करे उन के गुदेन्द्रिय में पाप रूप भयङ्कर रोग होता है ॥ १६ ॥ एक महीने तक देवता का पूजन करने, दो गो देने, और एक प्राजापत्य व्रत करने से गुदा के रोग शान्त होते हैं ॥ १७ ॥ गर्भस्थिति को रोकने वाली स्त्री काक वन्ध्या होती है । उस को यत्न के साथ विधि पूर्वक गोदान करने चाहिये ॥ १८ ॥ गर्भपात कराने से यकृत्-प्लीह-जलोदर रोग होते हैं उन की शान्ति के लिये आगे प्रायश्चित्त यह कहते हैं कि ॥१९॥ इन यकृत् आदि रोगों की शान्ति के लिये चार २ तोला सुवर्ण, चांदी और तांबा से युक्त विधि पूर्वक जल धेनु ब्राह्मण को देवे ॥ २० ॥ प्रतिमा को तोड़ने वाले के शरीर में अधिकांश फोड़ा फुंसी होते हैं वह पुरुष तीन वर्ष तक प्रति दिन पीपल वृक्ष के मूल में जल दिया करे ॥ २१ ॥ और अपने गृहासूत्रोक्त विधि से उस पीपल का विवाह करे । तथा उस पीपल के नीचे विघ्नों के राजा गणेश जी देवता का स्थापन करके पूजन करे ॥ २२ ॥ दुष्ट वचन बोलने वाला खण्डित ( अङ्गहीन ) होता है । वह दो घड़े दूध सहित आठ तोला चांदी