भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

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२ वसिष्ठस्मृतिः ॥

मृगो विचरति तावद्ब्रह्मवर्चसमित्यन्ये ॥१२॥ अथापि भा- ल्लविनो निदाने गाथामुदाहरन्ति ॥ १३ ॥ पश्चात्सिन्धुर्विहरिणी सूर्यस्योदयनंपुरः । यावत्कृष्णोऽभिधावति तावद्वैब्रह्मवर्चसम् ॥ १४ ॥ त्रैविद्यवृद्धायंब्रूयुर्धर्मन्धर्मविदो जनाः । पवनेपावनेचैव सधर्मोनात्रसंशयः । इति ॥१५॥ देशधर्मजातिधर्मकुलधर्मान् श्रुत्यभावादब्रवीन्मनुः ॥१६॥ सूर्याभ्युदितः सूर्याभिनिर्मुक्तः कुनखी श्यावदन्तः परिवित्तिः परिवेत्ताऽग्रेदिधिषूर्दिधिषूपतिर्वीरहा ब्रह्मोञ्झइत्येनस्विनः १७ पञ्च महापातकान्याचक्षते ॥१८॥ गुरुतल्पं सुरापानं भ्रूणहत्यां ब्राह्मणसुवर्णापहरणं पतितसंयोगञ्च ॥१९॥ ब्राह्मेण वा यौनेन


हैं कि जहां तक कृष्ण (कषांयल) हिरण स्वभाव से विचरते हैं वहां तक के प्रदेशों में ब्रह्मतेज होने से धर्म की भूमि है ॥ १२ ॥ और भी भाल्लवी शाखाध्यायी ऋषि लोग प्राचीन गाथा का उदाहरण देते हैं कि-॥१३॥ पश्चिम में विहार करती हुई सिन्धु नदी, पूर्व में सूर्य नारायण के उदय का स्थान और जहां तक कृष्ण मृग स्वभाव से विचरता है वहां तक ब्रह्मतेज (यज्ञियभूमि) है ॥ १४ ॥ तीनों वेद की विद्या में जो वृद्ध (विशेष जानकार) हैं वे धर्म का तत्त्व जानने वाले विद्वान् लोग जिस धर्म को कहें उसके पावन होने वा शोधक होने में सन्देह नहीं है ॥१५॥ देशधर्म, जातिधर्म, कुल धर्मों को श्रुति में न होने से मनुजी ने कहा है ॥१६॥ सूर्य के उदय तथा अस्त होने के समय जो सन्ध्यादि न करे, बिगड़े नखों वाला, कालेदांतों वाला, जेठभाई से पहिले अपना विवाह करने तथा अग्निहोत्र लेने वाला-परिवेत्ता, उसका बड़ाभाई परिवित्ति, जिस के आगे (विद्यमान रहते) ही स्त्री ने दूसरा पति कर लिया हो वह अग्रेदिधिषू और उसका द्वितीयपति-दिधिषूपति, स्थापित अग्नि को त्यागने वाला, और वेदाध्ययन को त्यागने वाला ब्राह्मण ये सब पापी कहाते हैं ॥१७॥ पांच महा पातक विद्वान् लोग कहते हैं ॥१८॥ गुरुपत्नीगमन, सुरापीना, भ्रूण (ब्राह्मण से ब्राह्मणी में हुए गर्भ की) हत्या करना, ब्राह्मण का सुवर्ण चुराना, और इन पतितों के साथ सम्बन्ध करना ॥१९॥ वह सम्बन्ध वेदादि के पढ़ने पढ़ाने