भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

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१० वसिष्ठस्मृतिः ॥

ह्यस्य प्राप्नोति, तत्तत्सरु तदुद्वपति गाञ्चाविंचाजा नश्वानश्व- तरखरोष्ट्रांश्च प्रफव्यं च पीवरीं दर्शनीयां कल्याणीं च प्रथमयु- वतीम् ॥४०॥ कथं हि लाङ्गलमुद्वपेदन्यत्र धान्यविक्रयात् ॥४१॥ रसा रसैर्महतो हीनतो वा निमातव्या नत्वेव लवणं रसैः॥४२॥ तिलतण्डुलपक्वान्नं विद्या मनुष्यांश्च विहिताः परिवर्तकेन ॥ ४३ ॥ ब्राह्मणराजन्यौ वार्धुष्यान्नं नाद्याताम् ॥ ४४ ॥ अ- थाप्युदाहरन्ति ॥ ४५ ॥ समर्घधान्यमुद्धृत्य महार्घयःप्रयच्छति । सवैवार्धुषिकोनाम ब्रह्मवादिषुगर्हितः ॥


मनुष्यों तथा पशुओं की जीवन रक्षा होती है यह हल उसी ना- सिका से ( उद्वपति ) पृथवी को खोदता भीतर से वेधन करता उखाड़ता है ( सोमपित्सरु ) सोमयागादि का अवसर भी यजमान को कृषि द्वारा अन्नादि की प्राप्ति से होता है। त्सरु नाम मुठिया ( पकड़ने का स्थान ) दबाने से वह ऊपर को महां उखाड़ता है। वह हल ( गामविमृ० ) गौ, भेड़, बकरी बकरा, घोड़ा, खच्चर, गधा, ऊंटो को ( प्रफर्येचपीवरीम् ) फुर्ती से चलनेवाली पुष्ट अंगों से युक्त मोटी २ प्रथम युवती (ओसर) गौ आदिको तथा ( प्रस्यावद्रथवाहनम् ) अच्छे दौड़नेवाले रथ नाम बग्घी के घोड़े आदि को प्राप्त कराता है ॥ ४० ॥ हलके द्वारा उत्पन्न किये धान्य को बेंचना अच्छा नहीं है ॥ ४१ ॥ अधिक वा कम रसों से रसों को बदला भले ही कर लेंवे । परन्तु किसी भी रस के बदले में लवण का लेन देन न करें ॥ ४२ ॥ तिल, चा- वल, पक्वान्न ( पूरी मिठाई आदि ) विद्या, और मनुष्यों का बदला भले ही कर लेवे । जैसे तिलों के बदले चावल वा चावलों के बदले तिल लेलेवे वा पक्वान्न देकर तिल चावल ले लेवे । किसी प्रकार की विद्या अन्य किसी को सि- खा देंवे उस के बदले अन्य किसी विद्या को सीख लेवे इत्यादि ॥ ४३ ॥ ब्रा- ह्मण, क्षत्रिय, दोनों सूद लेनेवाले का अन्न न खावें ॥४४॥ इस पर श्लोक प्र- माण कहते हैं कि-॥४५॥ जो किसानादि से सस्ता अन्न लेकर फिर उसको महंगा करके देता है वह वार्धुषिक (सूदखोर) कहाता और वह वेदमतावलम्बियों में निन्दित है। सूद लेनेवाला और ब्रह्महत्यारा इन दोनों को तराजू में तौला गया तो ब्रह्म हत्यारा हल्का होने से उठ गया और वार्धुषिक पाप से