भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

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भाषार्थसहिता ॥ १३

सहस्रशःसमेतानां परिषत्त्वंनविद्यते ॥ ७ ॥
यंवदन्तितमोमूढा मूर्खाधर्ममतद्विदः ।
तत्पापंशतधाभूत्वा तद्वक्तॄनधिगच्छति ॥ ८ ॥
श्रोत्रियायैवदेयानि हव्यकव्यानिनित्यशः ।
अश्रोत्रियायदत्तंहि पितॄर्न्नातिनदेवताः ॥ ९ ॥
यस्यचैवगृहेमूर्खो दूरेंचैवबहुश्रुतः ।
बहुश्रुतायदातव्यं नास्तिमूर्खेव्यतिक्रमः ॥ १० ॥
ब्राह्मणातिक्रमोनास्ति मूर्खेवेदविवर्जिते ।
ज्वलन्तमग्निमुत्सृज्य नहिभस्मनिहूयते ॥ ११ ॥
यश्चकाष्ठमयो हस्ती यश्चचर्ममयोमृगः ।
यश्चविप्रोऽनधीयानस्त्रयस्तेनामधारकाः ॥ १२ ॥
विद्वद्भोज्यान्यविद्वांसो येषुराष्ट्रेषुभुञ्जते ।
तान्यनावृष्टिमुच्छन्ति महद्वाजायतेभयम् । इति ॥१३॥

इकट्ठे होने पर भी वह सभा नहीं हो सकती ॥७॥ अज्ञानान्धकार में ग्रस्तधर्म का मर्म न जानने वाले मूर्ख ब्राह्मण जिस धर्म का निर्णय कर कहते हैं वह सैकड़ों प्रकार का पाप होकर उन धर्म वक्ता मूर्खों को प्राप्त होता है ॥ ८ ॥ देवता और पितरों सम्बन्धी भोजनादि दान नित्यशः सदैव वेदपाठी ब्राह्मणों को ही देना चाहिये । क्योंकि वेदपाठी से भिन्न ब्राह्मणों को दिया भोजनादि पितरों और देवों को प्राप्त नहीं होता ॥ ९ ॥ जिस के घर में वा अति समीप मूर्ख ब्राह्मण वसता हो और बड़ा विद्वान् दूर वसता हो तो विद्वान् को देना चाहिये क्योंकि मूर्ख का उल्लङ्घन वा अपमान नहीं माना जायगा ॥ १० ॥ वेद वेदाङ्गादि न पढ़े मूर्ख ब्राह्मण का उल्लंघन ब्राह्मण के उल्लंघन में नहीं गिना जायगा । क्योंकि जलते हुए अग्नि को छोड़के भस्म में होम नहीं किया जाता है ॥११॥ जो काष्ठ का हाथी जो चाम का हरिण और जो मूर्खब्राह्मण वे तीनों नाम ही मात्र हाथी आदि हैं असल में नहीं हैं ॥ १२ ॥ जिन राज्यों में विद्वानों को भोजन कराने योग्य उत्तम पदार्थों को अविद्वान् मूर्ख लोग भोगते हैं उनमें सूखा पड़ती दुर्भिक्ष होते वा भयंङ्कर दुर्घटना उपस्थित होती हैं॥१३॥