अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 702, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ें१४ वसिष्ठस्मृतिः ॥
अप्रज्ञायमानं वित्तं योऽधिगच्छे द्राजा तद्धरेदधिगन्त्रे षष्ठमंशं प्रदाय ॥ १४ ॥ ब्राह्मणश्चेदधिगच्छेत् षट्कर्मसु वर्त्तमानो न राजा हरेत् ॥ १५ ॥ आततायिनं हत्वा नात्र प्राणच्छेत्तुः किंचित्किल्विषमाहुः ॥ १६ ॥ षड्विधास्तत्वाततायिनः ॥१७॥ अथाप्युदाहरन्ति ॥ १८ ॥ अग्निदोगरदश्चैव शस्त्रपाणिर्धनापहः । क्षेत्रदारहरश्चैव षडेतेआततायिनः ॥ १९ ॥ आततायिनमायान्तमपिवेदन्तपारगम् । जिघांसन्तं जिघांसीयान्नतेन ब्रह्महाभवेत् ॥ २० ॥ स्वाध्यायिनंकुलेजातं योहन्यादाततायिनम् । नतेनभ्रूणहासस्यान्मन्युस्तंमन्युमृच्छति । इति ॥२१॥
कहीं अज्ञात गड़ा हुआ धन जिस को मिले उस को उस धन का छठा भाग देकर शेष को राजा ले लेवे ॥ १४ ॥ यदि वेदादि को पढ़ने पढ़ाने आदि अपने छः कर्मों में तत्पर ब्राह्मण को अज्ञात धन मिले तो राजा को कुछ नहीं लेना चाहिये ॥ १५ ॥ आततायी को मार डालने पर मारनेवाले को हत्या का कुछ भी पाप नहीं लगता ऐसा ऋषि लोग कहते हैं ॥ १६ ॥ छः प्रकार के मनुष्य आततायी होते हैं ॥ १७ ॥ इस पर श्लोक प्रमाण कहते हैं ॥ १८ ॥ १-आग लगाने वाला, २-विष देने वाला, ३-हाथ में शस्त्र लेके मारने को जो आता हो, ४-धन का नाश करने वा छीनने लूटने वाला, ५-खेतका सर्वथा नाश करने वाला और ६-किसी की स्त्री को बलात्कार हरने वा जबरदस्ती से स्त्री का धर्म बिगाड़ने वाला ये छः आततायी कहाते हैं ॥ १९ ॥ आततायी हो कर यदि वेद वेदान्त का पूर्ण विद्वान् ब्राह्मण भी आता हो तो अपने को मार डालना चाहते हुए उस आततायी को बिना विचारे ही मार डाले क्योंकि ऐसी दशा में ब्रह्महत्या का पाप नहीं लगेगा ॥२०॥ वेदपाठी कुलीन ब्राह्मण आततायी को जो मारडाले तो उस से मारने वाला ब्रह्महत्यारा नहीं होता क्योंकि वहां क्रोध का क्रोध से युद्ध माना जाता है ॥ २१ ॥