अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 710, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ें२२ वसिष्ठस्मृतिः ॥
भृति दिवसगणना सपिण्डता तु सप्तपुरुषं विज्ञायते ॥ १७ ॥ अप्रत्तानां स्त्रीणां त्रिपुरुषं त्रिदिनं विज्ञायते ॥१८॥ प्रत्तानामितरे कुर्वीरंस्तांश्च तेषां जननेप्येवमेव निपुणां शुद्धिमिच्छतां मातापित्रोर्बीजनिमित्तत्वात् ॥१९॥ अथाप्युदाहरन्ति ॥ २० ॥ नाशौचंसूतकेपुंसः संसर्गंचेन्नगच्छति । रजस्तत्राशुचिज्ञेयं तन्नपुंसिनविद्यते ॥ इति ॥ २१ ॥ तच्चेदन्तःपुनरापतेच्छेषेण शुध्येरन् ॥२२ ॥ रात्रिशेषे द्वाभ्यां प्रभाते तिसृभिः ॥ २३ ॥ ब्राह्मणोदशरात्रेण पक्षमात्रेणभूमिपः । विंशतिरात्रेणवैश्यः शूद्रोमासेनशुद्ध्यति ॥ २४ ॥ अत्राप्युदाहरन्ति ॥ २५ ॥ आशौचेशौद्रकेयस्तु सूतकेवापिभुक्तवान् ।
रात्रि शेष रहे मृत्यु हो तो पहिला दिन पूरा गिना जाय और सात पीढ़ी के मनुष्यों में सपिण्डता मानी जाती है ॥१७॥ बिना विवाही कन्याके मृत्यु में तीन पीढ़ी तक सपिण्डता और तीन दिन अशुद्धि माननी चाहिये ॥१८॥ विवाहित कन्याओं के मरण का मृतक पति के कुलवाले मानें । कन्या पुत्रों के जन्म होने पर भी इसी उक्त प्रकार अच्छी शुद्धि चाहते हुए सूतक शुद्धि करें क्योंकि माता पिता दोनों बीज के निमित्त हैं ॥ १९ ॥ इस पर श्लोक भी कहते हैं ॥ २० ॥
जन्म सूतक में पुरुष यदि मृतिका वा उसके पास जाने वालों से संपर्क न करे तो उनको अशुद्धि नहीं लगती क्योंकि मृतिका स्त्री की मलिनता ही वहां अपवित्रता है और वह पुरुष में नहीं है ॥२१॥ यह मरण सूतक वा जन्म सूतक एक के पूरे न होने से पहिले ही द्वितीय मरण वा जन्म होजाय तो पहिले की समाप्ति के साथ दोनों की शुद्धि कर लें ॥ २२ ॥ यदि पहिले सूतक की एक रात्रि शेष हो तो दो दिन और शुद्धि के दिन प्रातःकाल अन्य मरण जन्म हो तो तीन दिन का सूतक बढ़ा देवें ॥ २३ ॥ दश दिन में ब्राह्मण, पन्द्रह दिन में क्षत्रिय, बीश दिन में वैश्य और एक मास में शूद्र शुद्ध होता है ॥ २४ ॥ यहां भी श्लोक का उदाहरण कहते हैं ॥ २५ ॥
शूद्र के जन्म सूतक वा मरण सूतक में जिस न भोजन किया हो वह