भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

पृष्ठ 712, कुल 805 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 712

२४ वसिष्ठस्मृतिः ॥

अमृतमिति विज्ञायते ॥ २ ॥ अथाप्युदाहरन्ति ॥ ३ ॥
पितारक्षतिकौमारे भर्त्तारक्षतियौवने ।
पुत्राश्चस्थाविरेभावे नस्त्रीस्वातन्त्र्यमर्हति ॥ ४ ॥
तस्या भर्तुरभिचार उक्तः प्रायश्चित्तरहस्येषु ॥५॥ मासिमा-
सिरजोह्यासां दुष्कृतान्यपकर्षति ॥६॥ त्रिरात्रं रजस्वलाऽशुचि-
र्भवति, सा नाञ्ज्योन्नाभ्यञ्ज्यान्नाप्सु स्नायात्, अधःशयीत,
दिवा न स्वप्यात्, नाग्निं स्पृशेत्, न रज्जुं सृजेन्न दन्तान्धावयेन्न
मांसमश्नीयान्न ग्रहान्निरीक्षेत, न हसेन्न किंचिदाचरेत्, न ख-
र्वेण पात्रेण पिबेन्नाञ्जलिना वा पिबेत्, लोहितायसेन वा॥७॥
विज्ञायतेहीन्द्रस्त्रिशीर्षाणं त्वाष्ट्रं हत्वा पाप्मना गृहीतो म-
हत्तमाधर्मसंबद्धोऽहमित्येवमात्मानममन्यत, तं सर्वाणि भूतान्य-
भ्याक्रोशन् भ्रूणहन्भ्रूणहन्भ्रूणहन्निति, स स्त्रिय उपाधावत्,


है ऐसा श्रुति से जाना जाता है ॥ २ ॥ और भी श्लोक प्रमाण कहते हैं ॥ ३ ॥
बाल्यावस्था में पिता, युवावस्था में पति और वृद्धावस्था में पुत्र लोग रक्षा
करें ऐसे तीनों अवस्था में स्त्री स्वतन्त्र रहने योग्य नहीं है ॥ ४ ॥ उस स्त्री
का पति से वियोग प्रायश्चित्त और रहस्य नाम एकान्त में रहने के व्रतों में
कहा है ॥ ५ ॥ प्रत्येक मास में निकलने वाला आस्रव रक्त स्त्रियों के पापों
को नष्ट करता रहता है ॥ ६ ॥ रजस्वला स्त्री तीन दिन तक अशुद्ध रहती है
वह आंखों में अञ्जन, तैल मर्दन और जल में स्नान न करे, पृथिवी पर लोटे
सोवे, दिन को न सोवे, अग्नि का स्पर्श न करे, रस्सी न बटे, दांतों को न
मांजे, मांस न खावे, ग्रह नक्षत्रों को न देखे, न हंसे, न कुछ काम करे, छोटे
पात्र से वा अञ्जलि से जलादि न पीवे, और लाल पात्र से वा लोहे के पात्र
से भी जलादि न पीवे ॥७ ॥ शास्त्र से जाना जाता है कि इन्द्रदेव तीन शिर
वाले त्वष्टा के पुत्र वृत्रासुर को मारके पाप ग्रस्त हो कर महान् अधर्म से
सम्बद्ध मैं हूं ऐसा अपने को मानते हुए। उन इन्द्र से सब प्राणियों ने चि-
ल्ला २ कर कहा कि तुम भ्रूणहा ३ हो ऐसा तीनवार कहा तब वे इन्द्रदेव
स्त्रियों के समीप गये और जाकर कहा कि इस मेरी ब्रह्महत्या का तृतीयांश