भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

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भाषार्थसहिता ॥ ५१

छन्दोभ्यश्चेति ॥ १ ॥ ब्राह्मणान्स्वस्तिवाच्य दधि प्राश्य ततोऽध्यायानुपाकुर्वीरन् ॥ २ ॥ अर्धपञ्चममासानर्द्ध-षष्ठान्वाऽतऊर्ध्वं शुक्लपक्षेष्वधीयीत कामं तु वेदाङ्गानि ॥३॥

तस्यानध्यायाः ॥ ४ ॥ संध्यास्तमिते सन्ध्यास्वान्तःशवदिवाकीर्त्येषु नगरेषु कामं गोमयपर्युषिते परिलिखिते वा श्मशानान्ते शयानस्य श्राद्धिकस्य ॥ ५ ॥ मानवं चात्र श्लोकमुदाहरन्ति ॥ ६ ॥

फलान्यापस्तिलान्भक्ष्यान्यच्चान्यच्छ्राद्धिकंभवेत् । प्रतिगृह्याप्यनध्यायः पाण्यास्या ब्राह्मणाः स्मृताः।इति॥७॥

धातवः पूतिगन्धप्रभृताविरिणे, वृक्षमारूढस्य नावि सेनायां च भुक्त्वा चाऽऽर्द्रपाणेर्वाणशब्दे चतुर्दश्याममावास्या-


पूर्वक देवों ऋषियों और छन्दों के नाम से प्रधान आहुति करे ॥ १ ॥ ब्राह्मणों का स्वस्ति वाचन करा और दधि प्राशन करके अध्यायों का उपाकरण (प्रारम्भ) करें ॥२॥ साढ़ेचार वा साढ़ेपांच महिने निरन्तर वेदाध्ययन करके पश्चात् उत्सर्ग करके शुक्ल पक्षों में वेदों को और वेदाङ्गों को शुक्लकृष्ण दोनों पक्षों में यथेच्छ पढ़ाकरे ॥३॥ उस वेद के अनध्याय ये निम्न लिखित हैं ॥४॥ सायं प्रातः काल में सूर्यनारायण के अस्त होते वा उदय होते समय, गांव वा मुहल्ले में मुर्दा के विद्यमान होते, चाण्डालादि के समीप, और नगरों के भीतर वेद को न पढ़े। पहिले दिन का गोबर पड़ा होने, वा सब ओर खोदी भूमि पर रुचि हो तो पढ़े । श्मशान में वा श्मशान के समीप वेद को न पढ़े । लेटा हुआ, श्राद्ध करने बाद वा श्राद्ध में भोजन करके भी न पढ़े ॥५॥ यहां मनु जी का श्लोक प्रमाण में कहते हैं कि ॥६॥ फलों, जल, तिलों तथा भक्ष्य पदार्थों का और श्राद्ध सम्बन्धी वस्तु का दान लेकर वेद को न पढ़े क्योंकि हाथ ही जिनका मुख है ऐसे ब्राह्मण माने गये हैं ॥ ७ ॥ शरीर के धातु रुधिरादि के निकलने पर अथवा वात पित्त कफ के कोप में, दुर्गन्धादि से घृणित स्थान में, ऊषर भूमि में, वृक्ष पर चढ़के, नौका में बैठा हुआ, भोजन करके, गीले हाथ होने पर, बाण का शब्द होने पर, चतुर्दशी, अमावस्या, अष्टमी, अष्टका, गांठों को आसन पर लगा के,

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