अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 742, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ें५२ वसिष्ठस्मृतिः ॥
यामष्टम्यामष्टकासु प्रसारितपादोपस्थकृतस्योपाश्रितस्य च गुरुसमीपे मैथुनव्यपेतायां वाससा मैथुनव्यपेतेनानिर्णिंक्तेन ग्रामान्ते छर्दितस्य मूत्रितस्योच्चारितस्य ऋग्यजुषां च सामशब्दे वाऽजीर्णे निर्घाते भूमिचलने चन्द्रसूर्योपरागे दिङ्नादपर्वतनादकम्पपातेषूपलरुधिरपांशुवर्षेष्वाकालिकम् ॥ ८ ॥ उल्काविद्युत्स्रमासे त्रिरात्रम् ॥ ९ ॥ उल्काविद्युत्सज्योतिषम् ॥ १०॥ अपर्त्तावाकालिकमाचार्ये प्रेते त्रिरात्रमाचार्य्यपुत्रशिष्यभार्यास्वहोरात्रम् ॥११॥ ऋत्विग्योनिसंबन्धेषु च गुरोः पादोपसंग्रहणं कार्यम् ॥ १२ ॥ ऋत्विक्श्वशुरपितृव्यमातुलाननवरवयसः प्रत्युत्थायाभिवदेत् ॥ १३ ॥ येचैव
किसी की गोदी में बैठकर, गुरु जनों के समीप में, मैथुन किये आसन वा शय्या पर, वा मैथुन कर चुकी स्त्री के निकट, मैथुन करने समय के वस्त्र पहन के, ग्राम के समीप, वमन करने पर, मल मूत्र त्याग के बाद शुद्धि किये बिना, वेद को न पढ़े । सामवेद की उच्च ध्वनि होने पर ऋग्वेद यजुर्वेद को न पढ़ें। आकाश में शब्द होने पर, भूमि के चलने पर, चन्द्रग्रहण वा सूर्यग्रहण के समय, दिशाओं में वा पर्वत में गूंजने का शब्द हो वा पर्वत कांपे, वा पर्वत का कुछ भाग गिरे, पत्थर, रुधिर, तथा धूलिवर्षने पर इन सब हालतों में एक दिन रात वेद का अनध्याय रक्खे ॥ ८ ॥ उल्कापात और बिजली का गिरना साघर हो तो तीन दिन वेद न पढ़े ॥ ९ ॥ और उल्कापात वा बिजली का प्रबल भयंकर शब्द होने पर उसी दिन धारात भर का अनध्याय करे ॥ १० ॥ उल्कापात वा बिजली का शब्द वर्षा से भिन्न ऋतु में होतो एक दिन रात (उपद्रव के समय से अगले दिन उसी समय तक) अनध्याय करे। गुरु का स्वर्गवास होने पर तीन दिन तथा गुरु के पुत्र शिष्य और गुरुपत्नी के मरने पर एक दिन रात वेद न पढ़े ॥ ११ ॥ ऋत्विज् तथा मामा श्वशुरादि के मरने पर भी एक दिन रात का अनध्याय करे । ऋत्विज् या श्वशुरादि में भी जो गुरु हो अर्थात् जिस के पास वेदादि पढ़ा हो तो उस के पगों को छूना चाहिये ॥ १२ ॥ ऋत्विज, श्वशुर, चाचा, मामा, ये सब अपने से अधिक आयु के हों तो उन को आता देख के खड़ा हो जाय और अभिवादन करे ॥१३॥ जिन के