अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 751, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ेंभाषार्थसहिता ॥ ६१
इति ॥८॥ तस्मिंश्चेत् प्रतिगृहीत औरसः पुत्र उत्पद्येत, चतुर्थभागभागी स्याद्दत्तकः ॥९॥ यदि नाभ्युदयिकेषु युक्तः स्याद् वेदविप्लवित्रिनः सव्येन पादेन प्रवृत्ताग्रान् दर्भान् लोहितान् वोपस्तीर्य पूर्णपात्रमस्मै निनयेत् ॥ १० ॥ नेतारं चास्य प्रकीर्णकेशा ज्ञातयोऽन्वालभेरन्नपसव्यं कृत्वा गृहेषु स्वैरमापद्येरन्ननऊर्ध्वं ते न धर्मयेयुस्तद्मार्गस्तं धर्मयन्तः ॥११॥ पतितानां तु चरितव्रतानां प्रत्युद्धारः ॥१२॥ अथाप्युदाहरन्ति ॥१३॥
अग्रेऽभ्युद्धरतांगच्छेत् क्रीडन्निवहसन्निव ।
पश्चात्पातयतांगच्छेच्छोचन्निवरुदन्निव ॥ १४ ॥
आचार्यमातृपितृहन्तारस्तत्प्रसादाद्भयाद्वा, एषा तेषां
ना जाता है कि एक से बहुतों की रक्षा करे ॥ ८ ॥ उस दत्तक पुत्र के ले लेने पर यदि औरस पुत्र उत्पन्न हो जाय तो दत्तक पुत्र पिता के चतुर्थांश का भागी होगा ॥ ९ ॥ यदि वह दत्तक पुत्र शास्त्रोक्त कर्मों में तत्पर न हो किन्तु अधर्मादि कर्मों में प्रवृत्त हो निषेध करने पर भी न माने उलटा वेदविरोधी वेद को डुबाने वाला हो उस के लिये दक्षिणाग्र फैलाये कुशों वा लोहित तृणों पर एक जल से भरे मट्टी के पात्र को बायें पग से ढरका देवें ॥१०॥ चोटी तथा शिर के बाल खोलें बिखेरें हुए अपसव्य करके कुटुम्बी लोग उस जल पात्र ढरकाने वाले का अन्वारम्भ (कुशों द्वारा वा दहिने हाथ से स्पर्श) करें । फिर निरपेक्ष घर को लौट आवें इस के उपरान्त उस के साथ धर्म का व्यवहार रखते वा उस को धर्माचरण कराते हुए कुछ भी आचरण न करें (यह जीवित ही उस को तिलाञ्जलि देने की रीति दिखायी है) ॥ ११ ॥ यदि धर्म से पतित हुए उक्त प्रकार के मनुष्य प्रायश्चित्त कर लें तो उन के साथ ऐसा न करके जाति में मिला लेना चाहिये ॥१२॥ इस पर श्लोक का प्रमाण भी कहते हैं कि ॥१३॥ अन्यों का उद्धार वा उपकार करने वालों में क्रीड़ा करता तथा हंसता आनन्द मानता हुआ सा सब से आगे चले और किसी को पतित करते नीचे गिराते हुओं में शोक मनाता और रोता हुआ सा सब से पीछे चले ॥ १४ ॥ गुरु, माता, और पिता को जो ताड़ना करें उन का प्रायश्चित्त