अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 753, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ेंभाषार्थसहिता ॥ ६३
धनस्वीकरणपूर्व्वं धनीधनमवाप्नुयात्,इति ॥ ७ ॥
मार्गक्षेत्रयोर्विसर्गे तथा परिवर्तनेन तरुणगृहेष्वर्थान्त- रेषु त्रिपादमात्रम् ॥ ८॥ गृहक्षेत्रविरोधे सामन्तप्रत्ययः॥६॥ सामन्तविरोधे लेख्यप्रत्ययः ॥ १० ॥ प्रत्यभिलेख्यविरोधे ग्रा- मनगरवृद्धश्रेणिप्रत्ययः ॥ ११ ॥ अथाप्युदाहरन्ति ॥ १२ ॥ पैतृकंक्रीतमाधेयमन्वाधेयंप्रतिग्रहम् । यज्ञादुपगमोवेणिस्तथाधूमशिखाष्टमी,इति ॥१३ ॥ तत्रभुक्तानुभुक्तदशवर्षम् ॥ १४॥ अन्यथाऽप्युदाहरन्ति॥१५॥ आधिःसीमाबालधनं निक्षेपोपनिधिःस्त्रियः ।
साक्षी ( गवाहों ) का होना, और भोग होना, यह तीन प्रकार का प्रमाण विवाद के निर्णय में अपेक्षित है। धन लेने वाला ऋणी प्रथम स्वीकार करे तो धनी को उस का धन दिलाया जावे ॥७॥ मार्ग तथा खेत के छोड्ने तथा बदलने से नये घरों में अर्थान्तर करलेने पर अर्थात् घर के स्थान में खेत वा खेत की जगह घर हो जाने पर घर वाले को उस का तीन भाग मूल्य मिले ॥ ८ ॥ घर और खेत के विवाद में विरोध होतो सामन्त ( नंबरदार ) की बात मानी जाय ॥६॥ कई नम्बरदार हों और वे परस्पर विरुद्ध कहें तो लेख जिस का मिले वह माना जाय ॥१०॥ लेख में भी विरोध होतो गांव तथा नगर के वृद्ध लोगों की बात ठीक मानी जाय ॥११॥ इस पर भी श्लोक प्रमाण कहते हैं कि ॥१२॥ जिसके पिताका हो, जिसने खरीदा हो, जिसने स्थापित किया, जिसने जीर्णोद्धार किया, जिसको दान में मिला, यज्ञ की दक्षिणा में जिसको मिला, जिसकी हद्द में हो और कोइलादि चिन्ह मिलें। ये आठ रीति निर्णय करने की हैं कि जिसके पिता का होना आदि सिद्ध हो वह वस्तु उसी का जानो ॥१३॥ अन्यके पदार्थ को भी जिसने दश वर्ष तक भोगा तथा फिर२ भोग किया तब उसी का होजाता है ॥ १४ ॥ इस पर अन्य प्रकार से भी श्लोक प्रमाण कहते हैं कि ॥ १५ ॥ गिर्वी रक्खा वस्तु, सीमा,बालक का धन,गिनाय के दिया वा ताले में बन्द बक्सादि में रक्खा धरोहर, स्त्रियां, ( दासी ) राजा का धन और वेदपाठी का धन ये सब जिसके यहां बहुत काल भी रहें तो भी अन्य के काम में