अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 754, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ें६४ वसिष्ठस्मृतिः ॥
राजस्वंश्रोत्रियद्रव्यं नसंभोगेनहीयन्ते ॥ १६ ॥
प्रहाणद्रव्याणि राजगामीनि भवन्ति ॥ १७ ॥ ततोऽन्य-
था राजा मन्त्रिभिः सह नागरैश्च कार्याणि कुर्य्यात् ॥१८॥
वेधसो वा राजा श्रेयान् गृध्रपरिवारं स्यात् ॥ १६ ॥ गृध्रप-
रिवारं वा राजा श्रेयान् ॥ २० ॥ गृध्रपरिवारं स्यान्न गृध्रो
गृध्रपरिवारं स्यात् परिवाराद्धि दोषाः प्रादुर्भवन्ति स्तेयहार-
विनाशनं तस्मात् पूर्वमेव परिवारं पृच्छेत् ॥२१॥ अथ सा-
क्षिणः ॥ २२॥ श्रोत्रियोरूपवान् शीलवान् पुण्यवान् सत्यवा
न् साक्षिणः सर्वेषु सर्वएव वा ॥ २३ ॥
स्त्रीणांसाक्ष्यंस्त्रियःकुर्यु र्द्विजानांसदृशाद्विजोः ।
शूद्राणांसन्तःशूद्रांश्च,अन्त्यानामन्त्ययोनयः ॥ २४ ॥
अथाप्युदाहरन्ति ॥ २५ ॥
प्रातिभाव्यंवृथादानं साक्षिकंशौरिकंचयत् ।
छाने मात्र से ये अन्य के नहीं हो जाते हैं ॥ १६ ॥ जिसका कोई दायभागी न हो ऐसे नष्ट हुए मनुष्य का धन राजा के काम में जाना चाहिये ॥ १७ ॥ तिससे अन्य प्रकार राजा मन्त्रियों और नगर के सभ्य मनुष्यों के साथ राज कार्यों को करे ॥ १८ ॥ अथवा गीध पक्षी के समान परिवारवाला राजा विधाता से भी अच्छा होता है । इससे गृध्रपरिवार हो ॥१९॥ गृध्रपरिवार राजा कल्याणकारी है ॥२०॥ गृध्रपरिवार हो पर लालची न हो उदार प्रकृति रहे । लालची परिवार से ही चोरी लूट और विनाशादि दोष होते हैं इससे पहिले ही सब कामों में भाई बन्धुओं की सलाह सम्मति पूछकर काम करे ॥ २१ ॥ अब साक्षियों के विषय का विचार करते हैं ॥ २२ ॥ वेद पाठी, सुरूपवान्, सुशील, पुण्यात्मा, सत्यवादी, सब वर्णों में से साक्षी किये जावें वा सभी प्रकार के साक्षी हों तो बुरों से अच्छों की परीक्षा होगी ॥ २३ ॥ स्त्रियों की गवाही स्त्रियां ही देवें । तथा द्विजों के साक्षी उन्हीं २ के तुल्य द्विज होवें । शूद्रों के साक्षी अच्छे प्रतिष्ठित शूद्र और अन्त्यजों के गवाह भी अन्त्यज ही होने चाहिये ॥२४॥ और भी श्लोक का प्रमाण कहते हैं कि ॥ २५ ॥ किसी की जामिनी करना, किसी को व्यर्थ देने की प्रतिज्ञा, साक्षी, द्यूत सम्बन्धी, दण्ड (जुर्माना)