अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 755, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ेंभाषाथंसंहिता ॥ ६५
दण्डशुल्कावशिष्टंच नपुत्रोदातुमर्हति, इति ॥ २६ ॥
ब्रूहिसाक्षिन्यथातत्त्वं लम्बन्तेपितरस्तव ।
तववाक्यमुदीक्षाणाउत्पतन्तिपतन्तिच ॥ २७ ॥
नग्नोमुण्डःकपालीच भिक्षार्थीक्षुत्पिपासितः ।
अन्धःशत्रुकुलेगच्छेद्यःसाक्ष्यमनृतंवदेत् ॥ २८ ॥
पञ्चपश्वनृतेहन्ति दशहन्तिगवानृते ।
शतमश्वानृतेहन्ति सहस्त्रंपुरुषानृते ॥ २९ ॥
व्यवहारेमृतेदारे प्रायश्चित्तंकुलस्त्रियाः ।
तेषांपूर्वपरिच्छेदाच्छिद्यन्तेऽत्रापवादिभिः ॥ ३० ॥
उद्वाहकालेरतिसंप्रयोगे प्राणात्ययेसर्वधनापहारे ।
और पिछला बाकी कर, इन सब पिताके प्रारम्भ किये कामों का पता के न रहने पर पुत्र उत्तर दाता नहीं है ॥२६॥ साक्षीसे न्यायाधीश वा अदालत की ओर से नियत हुआ वकील ऐसा कहे कि-हे साक्षिन् ! जैसा तुम जानते हो वैसा ठीक २ सत्य कहो क्योंकि तुम्हारे वाक्य की प्रतीक्षा करते (बाटदेखते) हुए तुम्हारे पितर लोग बीच में लटक रहे हैं । यदि तुम सत्य बोले तो उस सत्य के प्रभाव से तुम्हारे पितर लोग ऊपर के स्वर्गलोकों में प्राप्त हो जांयगे और यदि मिथ्या बोले तो नीचे नरक में गिराये जावेंगे ॥२७॥ आंखों से अन्धा होके नंगा, मुंड़ा हुआ, भूख प्यास से पीड़ित, खप्पर हाथ में लेकर भिक्षा मांगता हुआ शत्रु के घर पर जाकर वह पुरुष दीनता दिखाता है कि जो झूठी गवाही देवे ॥ २८ ॥ साक्षी वा मध्यस्थ पुरुष यदि अन्य पशुओं के विषय में मिथ्या कहे तो पांच, गौ के विषय में झूठ कहे तो दश, घोड़ा के विषय में मिथ्या कहे तो सौ १०० और मनुष्य के विषय में मिथ्या साक्षी देवे तो १००० एक सहस्त्र हत्या का अपराधी होता है ॥ २९ ॥ व्यवहार में, स्त्री के मरने पर और कुलस्त्री का प्रायश्चित्त इन का पूर्व से सम्बन्ध नष्ट किया जाय अर्थात् साथ में न रक्खा जाय तो निन्दक लोग उन सम्बन्धनाशकों का छेदन वा उपहास आक्षेपादि द्वारा करते हैं । अर्थात् व्यवहारादि में पूर्व (अमलियत) सत्य के साथ सम्बन्ध तोड़ना बड़ा पाप है ॥ ३० ॥ परन्तु कन्या के विवाह के लिये, मैथुन के विषय में, प्राण जाने के अवसरमें, सब धनका नाश होता