अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 757, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ेंभाषाधर्मसहिता ॥ ६१
अथपुत्रस्यपौत्रेण ब्रध्नस्याप्नोतिविष्टपम्,इति ॥ ५ ॥
क्षेत्रिणः पुत्रो जनयितुः पुत्रइति विवदन्ते ॥ ६ ॥ तत्रो-
भयथाप्युदाहरन्ति ॥ ७ ॥
यद्यन्यगोषुवृषभो वत्सानांजनयेच्छतम् ।
गोमिनामेवतेवत्सा मोघंस्यन्दितमार्षभम्,इति ॥ ८ ॥
अप्रमत्तारक्षततन्तुमेतं मावःक्षेत्रेपरबीजानिवाप्सुः ।
नजनयितुःपुत्रोभवतिसंपरायेमोघंवेत्ताकुरुतेतन्तुमेतमिति ॥६॥
बहूनामेकजाताना मेकश्चेत्पुत्रवान्नरः ।
सर्वेतेतेनपुत्रेण पुत्रवन्तइतिश्रुतिः ॥ १० ॥
बह्वीनामेकपत्नीनामेकापुत्रवतीयदि ।
सर्वास्तास्तेनपुत्रेण पुत्रवत्यइतिश्रुतिः ॥ ११ ॥
के स्वर्ग को प्राप्त होता है ॥ ५ ॥ अन्य की स्त्री में जो अन्य पुरुष से पुत्र उत्पन्न होता है वह स्त्री वाले का पुत्र है वा बीज जिस का पड़ा उस का है इस पर दोनों पक्ष वाले विवाद करते हैं ॥६॥ उन में दोनों प्रकार के उदाहरण (प्रमाण) श्लोकों द्वारा देते हैं कि ॥ ७॥ यदि अन्य की गौओं में किसी का बैल सौ बछड़े भी पैदा करे तो वे सब बछड़े गौ वाले के होंगे। और बैल का वीर्य सेचन व्यर्थ ही होगा। अर्थात् बैल वाले को कुछ फल नहीं मिलेगा ॥ ८ ॥ हे मनुष्यो ! प्रमाद को छोड़ कर इस सन्तान की रक्षा करो तुम्हारे खेत (स्त्री) में अन्य लोग बीज न बोयें (तभी शुद्ध सन्तान होंगे। अन्य के बीज से खेत के दूषित हो जाने पर सन्तति बिगड़ जायगी, अर्थात् खेत की रक्षा द्वारा सन्तति की रक्षा करो) पैदा करने (बीज) वाले का पुत्र नहीं होता और अन्य के बीज से पैदा हुए पुत्र को जो क्षेत्र (स्त्री) वाला प्राप्त होता है वह जन्मान्तर में अपने डुबोने वाले को पुत्र बनाता है ॥ ९ ॥ एक पिता से उत्पन्न हुए अनेक भाइयों में एक भी पुत्रवान् हो तो उसी एक पुत्र से सब भाई पुत्र वाले हो जाते हैं यह श्रुति में लिखा है ॥१०॥ एक पुरुष की कई स्त्रियां हों तो उनमें एक स्त्री के उत्पन्न हुए पुत्र से सब पुत्र-वालीं हो जाती हैं क्योंकि वही एक उन सब पिता चाचाओं तथा सब माताओं के स्वत्त्व का दायभागी और पिण्ड देने वाला होगा ॥ ११ ॥ पुराने
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