अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 758, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ें६८ वसिष्ठस्मृतिः ॥
द्वादशइत्येव पुत्राः पुराणदृष्टाः ॥१२॥ स्वयमुत्पादितः स्व- क्षेत्रे संस्कृतायां प्रथमः ॥ १३ ॥ तदलाभे नियुक्तायां क्षेत्रजो द्वितीयः ॥ १४॥ तृतीयः पुत्रिका विज्ञायते ॥ १५ ॥ अभ्रातृका पुंसः पितॄनभ्येति प्रतीचीनं गच्छति पुत्रत्वम् ॥ १६ ॥ तत्र श्लोकः ॥ १७ ॥ अभ्रातृकांप्रदास्यामि तुभ्यंकन्यामलङ्कृताम् । अस्यांयोजायतेपुत्रः समेपुत्रोभवेदिति ॥ १८ ॥ पौनर्भवश्चतुर्थः ॥ १९ ॥ या कौमारं भर्त्तारमुत्सृज्यान्यैः सह चरित्वा तस्यैव कुटुम्बमाश्रयति सा पुनर्भूभवति ॥२०॥ या च क्लीबं पतितमुन्मत्तं वा भर्त्तारमुत्सृज्यान्यं पतिं विन्द- ते मृते वा सा पुनर्भूभवति ॥ २१ ॥ कानीनः पञ्चमः ॥ २२ ॥
लोगों ने वा पुराण ग्रन्थों में बारह ही प्रकार के पुत्र देखे जाने वा माने जाते हैं ॥१२॥ अपनी विवाहिता पत्नी में स्वयं उत्पन्न किया पहिला औरस ॥१३॥ औरस के न होने पर नियुक्त स्त्री में उत्पन्न किया द्वितीय क्षेत्रज ॥ १४ ॥ पुत्री में होने वाले सन्तान को अपना दायभागी स्वीकार करना तीसरा ॥१५॥ श्रुति वेद में लिखा है कि "जिस के कोई भाई नहीं होता ऐसी कन्या पति के घर जाकर पति के मेल से आप ही पुत्र भाव को प्राप्त होती और फिर उलटी आ कर पिता की दायभागिनी बनती तथा पिण्ड देके पिता को संसार से पार करती है"॥१६॥ उसमें श्लोक भी प्रमाण है ॥१७॥ कन्या का पिता वरसे कहता है कि विना भाई वाली वस्त्रों तथा आभूषणों से शोभित कन्या मैं तुम को दूंगा। इस कन्या में जो पुत्र उत्पन्न होगा वह मेरा पुत्र हो ॥१८॥ पुनर्भू (जिस ने पहिले पति को त्याग के अन्य पति कर लिया हो) से उत्पन्न प्रथम पतिका चौथा पौनर्भव पुत्र कहाता है ॥ १९ ॥ जो स्त्री अपने कुमारपति को त्याग कर अन्य पुरुषों के साथ सब प्रकार का व्यवहार करके उसी पहिले पति का फिर सहारा लेवे वह स्त्री पुनर्भू कहाती है ॥२०॥ और जो स्त्री नपुंसक पतित वा उन्मत्त हुए वा मर जाने पर अपने पति को त्याग के अन्य पति को प्राप्त होती वह भी पुनर्भू कहाती है ॥ २१ ॥ विवाह से पहिले कन्या में पैदा हुआ पांचवां कानीन पुत्र कहाता है ॥२२॥ जो विना विवाही पिता के घर में काम