भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

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१२ वसिष्ठस्मृतिः ॥

धारयेत्॥६॥ दण्डस्तु देशकालधर्मवयोविद्यास्थानविशेषैर्हिंसा- क्रोशयोः कल्प्य आगमादृष्टान्ताच्च ॥ ७॥ पुष्पफलोपगान्पा- दपान्न हिंस्यात्कर्षणकरणार्थं चोपहन्यात् ॥८॥ गार्हस्थ्याङ्- गानां च मानोन्माने रक्षिते स्याताम् ॥ ९ ॥ अधिष्ठानान्न- नीहारः स्वार्थानां,मानमूल्यमात्रं नैहारिकंस्यात्॥१०॥ महा- महयोः स्थानात् पथः स्यात् ॥ ११ ॥ संय्याने दशवाहवाहिनी द्विगुणकारिणी स्यात् ॥ १२ ॥ प्रत्येकं प्रयास्यः पुमान् ॥१३॥ पुंसां शतावराध्यं चाऽऽहवयेद्व्यर्थाः स्त्रियः स्युः ॥ १४ ॥ क- रा अष्टौ कृष्णलमाषसुवर्णमध्यधरणपलपादकार्षापणाः स्यु-


यदि अपने २ धर्म से च्युत होते हों तो दण्ड देकर ठीक धर्म की व्यवस्था करे ॥ ६ ॥ देश, काल, धर्म, अवस्था, विद्या और स्थान इन सब की विशेषताओं का हिंसा होने तथा रोने चिल्लाने के विषय में विचार करके शास्त्र द्वारा और लौकिक दृष्टान्तों से दण्ड की भिन्न २ न्यूनाधिक कल्पना करे ॥ ७ ॥ फल फूल देनेवाले वृक्षों को न कटवावे परन्तु खेती कराने के उपयोगी वृक्षों को भलेही कटावे ॥ ८ ॥ गृहाश्रम सम्बन्धी पदार्थों की तौल नाप ठीक सुरक्षित रक्खे ॥ ९ ॥ अपने नगर के व्यापारी आदि से अन्नादिका नियत भाग राज कर में न लेवे किन्तु उस भाग का मूल्य नियत करके उतनाइ धन उनर से लिया करे ॥ १० ॥ देवस्थान पाठशाला धर्मशालादि के धन पर, श्मशान ( मरघट ) और मार्ग ( सड़क ) इनका महसूल वा इनपर कर ( टैक्स ) राजा न लेवे ॥ ११ ॥ युद्ध के लिये यात्रा करे तब ( ८१ रथ। ८१ हाथी । २४३ सवार और ४०५ पैदल सिपाही इतनी फौज को एक वाहिनी कहते हैं ) ऐसी वीश पल्टनें लेकर युद्ध में चढ़ाई करे ॥ १२ ॥ फौज में प्रत्येक मनुष्य तथा हाथी घोड़ादि रुष्टपुष्ट नीरोग परिश्रमी हो ॥१३॥ ऐसी रीति युक्ति से युद्ध करावे जिसमें माँसे भी बहुत कम योद्धा मारे जावें। जिनसे विधवा होकर उनर की स्त्रियों का जन्म व्यर्थ न होवे ॥ १४ ॥ कृष्णल, माष, सुवर्ण, मध्य, धरण, पल, पाद, कार्षापण ये आठ प्रकार के तौल वाचक कर हैं। वस्तुओं के न्यूनाधिकलाभ देखकर भिन्न२ कर नियत करे । जल-

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