अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 783, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ेंभाषार्थसंहिता ॥ ८३
उपवासन्यायेन पयोव्रतता फलभक्षता प्रसृतयावको हिरण्यप्राशनं सोमपानमिति मेध्यानि ॥ ६ ॥ सर्वे शिलोच्चयाः सर्वाः स्रवन्त्यः पुण्या हृदास्तीर्थान्यृषिनिवासगोष्ठपरिष्कन्धा इति देशाः ॥ ७ ॥ संवत्सरो मासश्चतुविंशत्यहो द्वादशाहः षडहस्त्र्यहोऽहोरात्रञ्चेति कालाः ॥८॥ एतान्येवानादेशे विकल्पेन क्रियेरन्, एनःसु गुरुषु गुरूणि लघुषु लघूनि ॥६॥ कृच्छ्रातिकृच्छ्रौ चान्द्रायणमिति सर्वप्रायश्चित्तिः सर्वप्रायश्चित्तिरिति ॥ १० ॥
इति वासिष्ठे धर्मशास्त्रे द्वाविंशोऽध्यायः ॥ २२ ॥
ब्रह्मचारी चेत्स्त्रियमुपेयादरण्ये चतुष्पथे लौकिकेऽग्नौ रक्षोदैवतं गर्दभं पशुमालभेत, नैऋर्तं वा चरुं निर्वपेत्, तस्य जुहुयात्कामाय स्वाहा, कामकामाय स्वाहा, निर्ऋत्यै स्वाहा, रक्षोदेवताभ्यः स्वाहेति ॥ १ ॥ एनदेव रेतसः प्रयत्नोत्सर्गे
उपवास की रीति से दूध का व्रत, केवल फल खाना, मुट्ठी भर कुलत्थ, सुवर्ण, सोमपान, इनमें से किसी एक को कुछ नियत काल तक सेवन करते हुए व्रत करना बुद्धि को शुद्ध करता है ॥ ६ ॥ सब पर्वत, सब नदियां, तालाब, तीर्थ, ऋषियों के निवास स्थान, गोशाला, बड़े २ प्राचीन नामी वृक्ष वटपीपलादि ये सब पवित्र देश हैं ॥७॥ एक वर्ष, एक महिना, २४ दिन, बारह दिन, छः दिन, तीन दिन, और एक दिन ये प्रायश्चित्त के काल हैं ॥ ८ ॥ इन्हीं में से किसी नियत काल तक विकल्प से अर्थात् किसी अपराध में किसी काल तक प्रायश्चित्त वहां करें कि जहां काल का नियम न किया हो । बड़े पापोंमें बड़ा प्रायश्चित्त और छोटे पापों में छोटा प्रायश्चित्त करे ॥ ९ ॥ कृच्छ्र, अतिकृच्छ्र, और चान्द्रायण ये सभी अपराधों पर प्रायश्चित्त हैं ॥ १० ॥
यह वासिष्ठ धर्मशास्त्र के भाषानुवाद में बायीशवां अध्याय पूरा हुआ ॥२२॥
यदि ब्रह्मचारी पुरुष किसी स्त्री से वन में संग करे तो चौराहे पर लौकिक अग्नि में राक्षस देवता वाले गर्दभ पशु का आलम्भन करे । अथवा निर्ऋति देवता का विधि पूर्वक चरु बना कर आघारादि पूर्वक (कामाय स्वाहा) इत्यादि चार आहुति देवे ॥ १ ॥ प्रयत्न के साथ वीर्य के निकाल देने, दिन को सोने अथवा अन्य नियमों के टूटने पर भी समावर्त्तन के समय तक