भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

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९१ | वसिष्ठस्मृतिः ॥

दिवा स्वप्ने व्रतान्तरेषु वा ऽऽसमावर्त्तनात्तिर्यग्योनिव्यवाये ॥२॥ शुक्रमृषभं दद्यात् ॥ ३ ॥ गां गत्वा शूद्रावधेन दोषो व्याख्यातः ॥४॥ ब्रह्मचारिणः शवकर्मणो व्रतान्निवृत्तिरन्यत्र मातापित्रोः ॥५॥ स चेद् व्याधीयीत कामं गुरोरुच्छिष्टं भेषजार्थं सर्वं प्राश्नीयात् ॥६॥ गुरुप्रयुक्तश्चेन्म्रियेत त्रीन्कृच्छ्रांश्चरेद् गुरुः ॥ ७ ॥ ब्रह्मचारी चेन्मांसमश्नीयादुच्छिष्टभोजनीयं कृच्छ्रं द्वादशरात्रं चरित्वा व्रतशेषं समापयेत् ॥८॥ श्राद्धसूतकभोजनेषु चैवम् ॥ ९ ॥ अकामतोपनतं मधु वाजसनेयके न दुष्यतीति विज्ञायते ॥१०॥ यआत्मत्याग्यभिशस्तो भवति सपिण्डानां प्रेतकर्मच्छेदः ॥ ११ ॥ काष्ठलोष्टजलपाषाणशस्त्रविषरज्जुभिर्यआत्मानमवसादयति, स आत्महा भवति ॥१२॥ अथाप्युदाहरन्ति ॥ १३ ॥


यही प्रायश्चित्त करे। यदि पशुस्त्री गौ आदि से मैथुन करे तो ॥२॥ उक्त होम के पश्चात् श्वेत बैल दक्षिणा में देवे ॥ ३ ॥ गौ के साथ मैथुन करे तो पूर्व कहे शूद्रा स्त्री के वध का प्रायश्चित्त करे ॥४॥ माता पिता के मरण को छोड़ के अन्य के मरने पर ब्रह्मचारी को सूतक का दोष नहीं लगता है ॥ ५ ॥ यदि ब्रह्मचारी रोगी हो जाय तो दवाई के विचार से केवल गुरु का उच्छिष्ट मात्र भोजन करे ॥ ६ ॥ गुरु की प्रेरणा से यदि ब्रह्मचारी मर जावे तो गुरु तीन कृच्छ्रव्रत करके प्रायश्चित्त करे ॥ ७ ॥ ब्रह्मचारी यदि मांस खा लेवे तो उच्छिष्ट भोजनांश द्वारा बारह दिन तक कृच्छ्रव्रत करके प्रायश्चित्त को समाप्त करे ॥ ८ ॥ किसों के श्राद्ध और सूतक में ब्रह्मचारी भोजन करे तो भी यही उक्त प्रायश्चित्त करे ॥ ९ ॥ बिना कामना के ब्रह्मचारी का वीर्य निकल जाय तो मधु वाजसनेय श्रुति से जाना जाता है कि दोष नहीं लगता ॥१०॥ जो निन्दित पुरुष स्वयं आत्मघात करके मरे उस का सपिण्डों को प्रेतनिर्वपणं पिण्डदानादि कर्म नहीं करना चाहिये ॥ ११ ॥ काष्ठ से दब के, मट्टी से दब के, जल में डूब के, पत्थरों से पिच कर वा दब के, शस्त्र से शिर काट कर, विष खाके, और फांसी लगा के जो पुरुष अपनी हत्या करता है वह आत्मघाती होता है ॥१२॥ और भी श्लोक का प्रमाण कहते हैं कि ॥ १३ ॥