भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

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पृष्ठ 786

९६ वसिष्ठस्मृतिः ॥

अधीयानानामन्तरागमने त्वहोरात्रमभोजनम्, त्रिरात्रमभिषे- को विवासश्चान्योन्येन ॥ २३ ॥ श्वमार्जारनकुलशौघ्रगाणा- महोरात्रम् ॥ २४ ॥ श्वकुक्कुटग्राम्यसूकरकङ्कगृध्रभासपारावत- मानुषकाकोलूकमांसादने सप्तरात्रमुपवासो निष्पुरीषभावो घृतप्राशः पुनःसंस्कारश्च ॥ २५ ॥ ब्राह्मणस्तुशुनादष्टो नदींगत्वा समुद्रगाम् । प्राणायामशतंकृत्वा घृतंप्राश्यततः शुचिः । इति ॥ २६ ॥ कालोऽग्निर्मनसः शुद्धि रुदकार्कावलोकनम् । अविज्ञानंचभूतानां षड्विधाशुद्धिरिष्यते, इति ॥ २७॥ श्वचाण्डालपतितोपस्पर्शने सचैलं स्नातः सद्यः पूतो भवतीति विज्ञायते ॥ २८ ॥ पतितचाण्डालशववहने त्रिरात्रं वाग्यता अनश्नन्त आसीरन्, सहस्रपरमं वा तदभ्यसन्तः पूता भवन्तीति विज्ञायते ॥ २९ ॥


वेदशास्त्र पढ़ते पढ़ाते हुए गुरु शिष्य के बीच से कोई निकले तो एक दिन रात उपवास करें । तीन दिन अभिषेक करें तथा गुरु शिष्य दोनों तीन दिन दूर २ रहें ॥ २३ ॥ कुत्ता, विलाव, न्योला, वा कोई दौड़ता हुआ वेदाध्यापन के समय गुरु शिष्य के बीच से निकल जावे तो दोनों गुरु शिष्य एक दिन रात उपवास करें ॥ २४ ॥ कुत्ता, मुर्गा, गांव का सुअर, चील्ह, गीध, भास, परेवा, गांव का कौवा, उल्लू, इनका मांस खा लेने पर सात दिन उपवास करे, उदर से मल की शुद्धि, और घी खावे तथा फिर से उपनयन संस्कार करे ॥ २५ ॥ यदि ब्राह्मण को कुत्ते ने काटा हो तो गंगा जी वा समुद्र तक गयी अन्य नदी पर जाके स्नान के पश्चात् सौ प्राणायाम कर घी खाके शुद्ध होता है ॥ २६ ॥ काल बीतना, अग्नि, मन की शुद्धि, जलाशय का दर्शन, सूर्यनारायण का दर्शन, और प्राणियों को न जानना देखना निर्जन एकान्त का वास ये छः प्रकार शुद्धि के साधारण हैं ॥ २७ ॥ कुत्ता, चाण्डाल और पतित का स्पर्श करे तो सचैल स्नान करने से तत्काल शुद्ध हो जाता है यह श्रुति से जाना गया है ॥ २८ ॥ पतित, चाण्डाल और मुर्दा को उठा के ले जाने पर मौन हुए तीन दिन विना कुछ खाते हुए बैठे रहें । और ( सहस्र परमं० ) मन्त्र का जप करें तो शुद्ध होते यह श्रुति से जाना जाता है ॥ २९ ॥ निन्दित निषिद्ध पुरुषों को