अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 791, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ेंभाषार्थसहिता ॥ १०९
प्रणवाद्यास्तथावेदाः प्रणवेपर्यवस्थिताः ।
वाङ्मयं प्रणवः सर्वं तस्मात्प्रणवमभ्यसेत् ॥ १० ॥
एकाक्षरंपरंब्रह्म पावनंपरमंस्मृतम् ।
सर्वेषामेवपापानां संकरेसमुपस्थिते ॥ ११ ॥
अभ्यासोदशसाहस्रः सावित्र्याःशोधनंमहत् ॥ १२ ॥
सव्याहृतिंसप्रणवां गायत्रींशिरसासहा ।
त्रिःपठेदायतप्राणः प्राणायामःसउच्यतेसउच्यतइति ॥ १३ ॥
इति वासिष्ठे धर्मशास्त्रे पञ्चविंशोऽध्यायः ॥ २५ ॥
प्राणायामान्धारयेत्त्रीन्यथाविध्यतन्द्रितः ।
अहोरात्रकृतंपापं तत्क्षणादेवनश्यति ॥ १ ॥
कर्मणामनसावाचा यदन्हाकृतमैनसम् ।
आसीनःपश्चिमां सन्ध्यां प्राणायामैर्व्यपोहति ॥ २ ॥
कर्मणामनसावाचा यद्रात्र्याकृतमैनसम् ।
उत्तिष्ठन्पूर्वसन्ध्यान्तु प्राणायामैर्व्यपोहति ॥ ३ ॥
प्राणायामैर्यआत्मानं संयम्याऽऽस्तेपुनःपुनः ।
प्रणव को आदि ले कर वेद चलते हैं अर्थात् प्रणव से वेदों की उत्पत्ति हुई, प्रणव में ही वेदों की स्थिति है। और वाणी का विषय शब्दमात्र सब प्रणव स्वरूप ही है तिस से प्रणव का निरन्तर अभ्यास करे ॥ १० ॥ सब प्रकार के पापों का घाल मेल होकर बड़ा संघट्ट हो जाने पर, पर ब्रह्मस्वरूप एकाक्षर प्रणव का अभ्यास करना परम पवित्र माना गया है ॥ ११ ॥ दश हजार गायत्री का एकान्त में शुद्धि के साथ श्रद्धा पूर्वक जप करना परम शुद्धि करने वाला है अर्थात् इस से अधिकांश पाप नष्ट हो जाते हैं ॥ १२ ॥ प्रणव, व्याहृति और शिरोमन्त्र इन सब के सहित गायत्री को प्राणगति रोक कर तीन वार पढ़े इसी को प्राणायाम कहते हैं ॥ १३ ॥
यह वासिष्ठ धर्मशास्त्र के भाषानुवाद में पच्चीशवां अध्याय पूरा हुआ ॥ २५ ॥
निरालस हो के विधि पूर्वक तीन प्राणायाम नित्य करे तो दिन रात में किया पाप तत्क्षण नष्ट हो जाता है ॥ १ ॥ मन, वाणी तथा शरीर से जो कुछ अपराध दिन भर में किया उस को सायंकाल की सन्ध्या में बैठ कर प्राणायाम करता हुआ नष्ट कर देता है ॥ २ ॥ इसी प्रकार मन, वाणी तथा शरीर से रात्रि में किये दोषों को प्रातःकाल की सन्ध्या में खड़ा हुआ प्राणायामों से नष्ट कर देता है ॥ ३ ॥ जो पुरुष अपने शरीरेन्द्रियों को प्राणायामों की