भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

पृष्ठ 87, कुल 805 में से

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२ भाषार्थसहिता ॥

धर्मस्येहसमग्रस्य नान्येावक्तास्तिसुव्रत ॥ ५ ॥ श्रुत्वाधर्मं चरिष्यामो यथावत्परिभाषितम् । तस्माद्ब्रूहिद्विजश्रेष्ठ धर्मकामाह्यमेद्विजाः ॥६॥ इत्युक्तोमुनिभिस्तैस्तु विष्णुःप्रोवाचतांस्तदा । अनघाःश्रूयतांधर्मो वक्ष्यमाणोमयाक्रमात् ॥ ७ ॥ ब्राह्मण क्षत्रियोवैश्यः शूद्रश्चैवतथापरे । एतेषांधर्मसारंयद ब्रुवतस्तन्निबोधत ॥ ८ ॥ ऋतौऋतौतुसंयोगाद्ब्राह्मणोजायतेस्वयम् । तस्माद्ब्राह्मणसंस्कारं गर्भादौतुप्रयोजयेत् ॥ ९ ॥ सीमन्तोन्नयनंकर्म नस्त्रीसंस्कारइष्यते । गर्भस्यैवस्तुसंस्कारो गर्भगर्भेप्रयोजयेत् ॥ १० ॥


भा०:-धर्म को सुनकर आपके कहने के अनुसार आचरण करेंगे इससे हे द्विजों में उत्तम तुम धर्म का वर्णन करो और ये द्विज धर्म की अभिलाषा वाले हैं ॥६॥ इस प्रकार जब उन मुनियों ने कहा उस समय उन से विष्णु ऋषि बोले कि हे शुद्ध निष्पाप मुनियो ! जिस धर्म को हम क्रम से कहेंगे उस को तुम सुनो ॥७॥ ब्राह्मण-क्षत्रिय-वैश्य और किन्हीं के मत से (शूद्र) के लिये भी धर्म का सारांश हम कहेंगे उसे तुम लोग सुनो । अर्थात् किन्हीं ऋषि आचार्यों का मत है कि शूद्र के लिये कोई भी धर्मोपदेश नहीं है । अन्यों के मत से स्मार्त्त धर्म में शूद्र को अधिकार है ॥८॥ ऋतु (रजो दर्शन से १६ दिन के भीतर) में स्त्री और पुरुष के संयोग से आप ब्राह्मण पैदा होता है इस से ब्राह्मण का संस्कार गर्भ से लेकर करे ॥९॥ सीमन्त (अतभागा) कर्म स्त्री का संस्कार नहीं है किन्तु गर्भ का है इस से प्रतिगर्भ में सीमन्त करे ॥ १० ॥

(१०) गर्भाधान, पुंसवन और सीमन्तोन्नयन ये तीनों संस्कार किन्हीं ऋषियों के मत में गर्भवती स्त्री के होते हैं और मनुष्य की पैदाइश के खेत रूप स्त्री के शुद्ध होने से सन्तान भी शुद्ध होते हैं। इस कारण गर्भाधानादि तीनों संस्कार प्रथम गर्भ में एक ही बार करे प्रतिगर्भ में नहीं। परन्तु विष्णु ऋषि का मत है कि सीमन्त संस्कार गर्भिणी का नहीं किन्तु गर्भ का ही संस्कार है इस से प्रत्येक गर्भ में कर्त्तव्य है ।

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